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E-Seminar on Education: राष्ट्रीय शिक्षा नीति से डॉक्टर, इंजीनियर की तर्ज पर तैयार होंगे भारतीय शिक्षक

Updated: | Wed, 14 Apr 2021 04:45 PM (IST)

E-Seminar on Education: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। भारतीय शिक्षण मंडल मध्य भारत प्रांत और मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्व विद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के लिए राष्ट्रीय पाठ्चर्या की रुप रेखा (2021) की भावी संकल्पनाएं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक तीन दिवसीय ई- विचारगोष्ठी आयोजित किया गया। विचार गोष्ठी पांच सत्रों में राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रुपरेखा की भावी संकल्पना में भारतीय शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर देश के जाने-माने शिक्षाविदों के द्वारा अपने विचार और सुझाव रखे जा रहे हैं। बौद्धिक विमर्श के प्रथम सत्र की अध्यक्षता: मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्व विद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. जयंत सोनवलकर, मुख्य वक्ता जे.एस. राजपूत, पूर्व अध्यक्ष एनसीईआरटी मुकूल कानित्कर, अखिल भारतीय संगठन मंत्री भारतीय शिक्षण मंडल ने स्वागत किया । कार्यक्रम एवं विषय प्रस्ताव डॉ. आशिष डोंगरे ने रखा। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे गुरु प्रणाम के मंत्रोच्चारण से भारतीय शिक्षा विषय पर शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता मुकूल कानित्कर ने कहा कि राष्ट्रीय परिचर्चा अच्छी हो तो पाठ्यक्रम और अध्ययन अच्छा ही होगा। जुलाई 2020 से लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूल शिक्षा की नींव के लिए पांच वर्ष का फाउंडेशन कोर्स के साथ ही भारतीय संस्कृति के पांच महत्वपूर्ण सोपान द्वारा भारतीय शिक्षा के माध्यम से आत्म निर्भर भारत की संकल्पना की है। सत्र के अंत में सत्र संयोजक भोज मुक्त विश्व विद्यालय के कुलसचिव डॉ.एल.एस. सोलंकी ने आभार के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से आत्म निर्भर भारत की संकल्पना के लिए अध्यापक/ शिक्षकों के लिए चार वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें डॉक्टर, इंजीनियर की तर्ज पर भारतीय शिक्षक/अध्यापक तैयार होने से भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत भारतीय छात्रों का भविष्य का निर्माण होगा। भारत को फिर से विश्व गुरु और भारत को सोने की चिडि़या का सम्मान की कल्पना की है।

शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा

मुख्य वक्ता के रूप में प्रो सीबी. शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के स्थान पर नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क पर जोर देते हुए स्कूल शिक्षा में अध्यापक के लिए चार वर्षों का प्रशिक्षण और पांचवीं, आठवीं और बारहवीं तक के शिक्षकों को समान वेतन से देश में भारतीय शिक्षा की संकल्पना की है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अमिताभ सक्सेना ने भारतीय शिक्षा भारतीय संस्कृति के अनुसार एक्शन वाली शिक्षा पर जोर दिया है। दूसरे सत्र में अध्यापक शिक्षा का स्थान विषय की अध्यक्षता प्रो. अमिताभ सक्सेना, कुलपति, डॉ. सीवी रमन विश्व विद्यालय खंडवा, मुख्य वक्ता प्रो. सीबी. शर्मा प्राध्यापक शिक्षा विभाग एवं पूर्व चेयरमैन एनआईओएस, स्वागत एवं विषय प्रस्ताव: सुब्रमण्यम बीए जी अखिल भारतीय सह प्रमुख, शालेय प्रकल्प, भारतीय शिक्षण मंडल, एवं सत्र संयोजक डॉ. एलएस सोलंकी कुलसचिव भोज मुक्त विश्व विद्यालय भोपाल द्वारा शिक्षा और उसकी गुणवत्ता में अध्यापक की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उच्च शिक्षा की नीव स्कूल शिक्षा पर निर्भर होने का महत्व बताते हुए सत्रारंभ किया गया।

Posted By: Lalit Katariya
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