Fertilizer Crisis in Madhya Pradesh: बोवनी शुरू होते तेजी से बढ़ रही मांग, गहरा रहा खाद संकट

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 07:31 AM (IST)

दस हजार टन डीएपी दो-तीन दिन में और पहुंचेगी, पिछले साल की तुलना में 53 हजार टन अधिक उपलब्ध है खाद

Fertilizer Crisis in Madhya Pradesh:भोपाल। (राज्य ब्यूरो)। प्रदेश में जैसे-जैसे रबी फसलों की बोवनी का काम तेज होता जा रहा है वैसे-वैसे खाद की मांग भी बढ़ती जा रही है। चंबल संभाग के बाद अब बुंदेलखंड, महाकोशल और विंध्य क्षेत्र में डीएपी की मांग बढ़ी है। मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने से कई जिलों में विक्रय केंद्रों पर भीड़ लगने लगी है। स्थिति यह बन गई किसानों को खाद के लिए पर्चियां दी जा रही हैं। खाद की मांग को लेकर सागर में जहां किसानों ने राजमार्ग 86 पर चक्का लगाया।

वहीं, बीना में आगासौद रोड स्थित रेलवे गेट पर ट्रैक जाम कर दिया। नरसिंहपुर, सिवनी और दमोह में भी किसानों ने खाद की कमी को लेकर हंगामा किया। उधर, सरकार का दावा है कि अभी भी एक लाख 30 हजार टन डीएपी उपलब्ध है। दस हजार टन डीएपी एक-दो दिन में और पहुंच जाएगा। यूरिया तीन लाख 20 हजार टन और एनपीके भी एक लाख पांच हजार टन उपलब्ध है। पिछले साल के मुकाबले करीब 53 हजार टन खाद अधिक उपलब्ध है।

धान की फसल कटने के बाद प्रदेश में रबी फसलों की बोवनी का काम तेज हो गया है।इसके लिए डीएपी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। पिछले साल अक्टूबर में तीन लाख टन डीएपी की मांग थी। इस बार यह चार लाख टन है। दो लाख टन खाद अब तक किसानों को दिया जा चुका है। एक लाख 30 हजार टन खाद उपलब्ध है और 10 हजार टन डीएपी दो-तीन में आ जाएगा। आंकडों की दृष्टि से देखें तो खाद की वैसी कमी नहीं है पर विक्रय केंद्रों पर भीड़ लग रही है। मुरैना में अक्टूबर में 10 हजार टन डीएपी की आवश्यकता होती है।

इसके हिसाब से इंतजाम किए गए थे लेकिन यह भी कम पड़ गए। 18 हजार टन डीएपी विक्रय हो चुका है। दो लाख 80 हजार टन यूरिया किसानों को दिया जा चुका है। 18 हजार 900 टन यूरिया दो-तीन में और आ जाएगा। अक्टूबर में यूरिया की मांग छह लाख टन अनुमानित है। एनपीके की मांग एक लाख टन है और 90 हजार टन बिक चुका है। एक लाख टन से ज्यादा खाद अभी भी उपलब्ध है। कृषि विभाग ने किसानों से डीएपी के विकल्प के तौर पर एनपीके का उपयोग करने की अपील की है। कृषि और सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी का कहना है कि खाद की आपूर्ति लगातार हो रही है।

कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बोवनी के समय यूरिया की जरूरत नहीं होती है पर इसकी मांग भी बढ़ रही है। जबकि, अभी बोवनी पूरी तरह से प्रारंभ भी नहीं हुई है लेकिन जिस तरह से डीएपी की मांग हो रही है, उससे यह लग रहा है कि किसान खाद का अग्रिम भंडारण करके रख रहे हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस तरह से खाद की कीमतें बढ़ी हैं और आपूर्ति प्रभावित हुई है, उससे किसान किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।

एक लाख 76 हेक्टेयर में हुई है बोवनी

प्रदेश में इस साल 138.89 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। इसके विरुद्ध अब तक एक लाख 76 हजार हेक्टेयर में बोवनी हुई है। पिछले साल इस अवधि में एक लाख 53 हजार हेक्टेयर में बोवनी हुई थी।

प्रतिदिन हो रही है समीक्षा

खाद संकट की स्थिति न बने, इसको लेकर कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारी प्रतिदिन समीक्षा कर रहे हैं। जहां से भी खाद की कमी की सूचना मिल रही है, वहां के कलेक्टर, कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों से अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी से लेकर अन्य अधिकारी जानकारी लेकर दिशानिर्देश दे रहे हैं। साथ ही कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं वे खाद वितरण की आंतरिक व्यवस्था बनाएं। खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों को पूर्व सूचना दें ताकि वे अनावश्यक रूप से दुकानों पर भीड़ न लगाएं।

खाद की कमी नहीं

कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि खाद की कमी नहीं है। लगातार खाद की आपूर्ति हो रही है। दो-तीन दिन में 21 रैक यूरिया, डीएपी और एनपीके पहुंचने वाला है। किसान कानून अपने हाथ में न लें और धैर्य रखें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खद की कालाबाजारी किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए। ऐसे करने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए। भंडार की भी नियमित जांच हो।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay