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Bhopal News: वन विहार में दो साल में चार बारहसिंगा की मौत, वन विभाग करेगा जांच

Updated: | Mon, 18 Jan 2021 11:59 AM (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। वन विहार नेशनल पार्क में बारहसिंगा की मौत क्यों हो रही है इसकी वजह जानने के लिए मध्य प्रदेश वन्य प्राणी विभाग जांच करेगा। इस जांच में बाड़े के अंदर तालाब के पानी, मिट्टी और उगने वाली खरपतवार की जांच की जाएगी। पार्क प्रबंधन को वन्यप्राणी विभाग को यह जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि पार्क में पहले 16 बारहसिंगा थे, जो अब 12 बचे हैं। पिछले दो साल में चार बारहसिंगा की मौत हो चुकी है।

बता दें कि साल 2015 में कान्हा टाइगर रिजर्व से वन विहार नेशनल पार्क में सात बारहसिंगा लाए गए थे। इससे इनकी संख्या बढ़कर 16 हो गई थी। इन बारहसिंगा को पार्क के अंदर एक अलग क्षेत्र में रखा जा रहा है, जहां दूसरे वन्य प्राणी नहीं आ-जा सकते। बाकायदा इनके लिए कवर्ड क्षेत्र बनाया गया है, उसी के अंदर तालाब है। घास के मैदान भी है और छोटी झाड़ियां है। पिछले 2 साल में चार बारहसिंगा की मौत कई सवाल पैदा करती है। हाल ही में एक बारहसिंगा को पार्क प्रबंधन ने मृत पाया था। उसके बाद मध्यप्रदेश वन्य प्राणी विभाग ने तय किया है कि बारहसिंगा की पार्क में मौत की जांच की जाएगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य प्राणी विभाग आलोक कुमार ने बताया कि यह जांच प्रदेश स्तर की टीम करेगी। यदि रहवास स्थल पर बारहसिंगा के जीवन को खतरा महसूस होता है तो उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है।

प्रदेश में केवल तीन जगह मिलते हैं हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा

वन विहार नेशनल पार्क में जो बारहसिंगा है, वे संकटग्रस्त श्रेणी के बारहसिंगा हैं और मध्य प्रदेश में केवल वन विहार समेत तीन जगहों पर मिलते हैं। इनका मूल रहवास स्थल कान्हा टाइगर रिजर्व है, जहां से इन्हें सबसे पहले वन विहार नेशनल पार्क में साल 2015 में शिफ्ट किया था। उसके बाद इन्‍हें होशंगाबाद के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बसाया गया है। होशंगाबाद के टाइगर रिजर्व में इनकी संख्या अच्छी खासी हो गई है, क्योंकि रिजर्व में इन्हें बोरी रेंज में बसाया है, जहां एक बड़ा प्राकृतिक क्षेत्र इनके लिए कवर्ड किया गया है। उस समय अधिक संख्या में भी इन्हें शिफ्ट किया गया था, इसलिए वहां तेजी से कुनबा बढ़ा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की तुलना में वन विहार में बारहसिंगा के लिए विचरण क्षेत्र भी सीमित है।

Posted By: Ravindra Soni
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