राज्यपाल और मुख्यमंत्री शनिवार को पातालपानी में करेंगे टंट्या मामा की प्रतिमा का अनावरण

Updated: | Fri, 03 Dec 2021 09:43 PM (IST)

मुख्य कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम इंदौर में, गौरव यात्राओं का होगा समागम

भोपाल। स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक टंट्या मामा के बलिदान दिवस पर शनिवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पातालपानी में उनकी प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इंदौर के नेहरू स्टेडियम में पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित होगा। जहां टंट्या मामा के जीवन काल पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है। जिसका अवलोकन राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री करेंगे।

मुख्यमंत्री टंट्या मामा गौरव कलश रथ, उनके वंशजों का स्वागत भी करेंगे। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कार्यक्रम में इंदौर जिले के प्रभारी एवं गृह मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संस्कृति-पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर, जनजाति कल्याण मंत्री मीना सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।

पातालपानी जनजातीय गौरव टंट्या मामा की कर्मस्थली है। यहां उनके सम्मान में राज्य सरकार उनकी 10 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित कर रही है। प्रतिमा ग्वालियर से लाई गई है। खंडवा जिले के बड़ौद अहिर और रतलाम जिले से निकलीं दो गौरव यात्राएं इंदौर पहुंच रही हैं।

शनिवार को नेहरू स्टेडियम से एक यात्रा शुरू होगी, जो भंवरकुआं चौराहा इंदौर पहुंचेगी। चौराहे का नामकरण टंट्या भील के नाम पर किया जाएगा। यहीं से लगभग पांच हजार मोटर साइकिल की रैली भी निकलेगी। उल्लेखनीय है कि निमाड़ और मालवा अंचल में टंट्या मामा के योगदान की गाथाएं घर-घर में सुनी और सुनाई जाती हैं। वर्ष 1842 में जन्मे टंट्या मामा को 1889 में ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी।

कर्म-स्थली के रूप में भी जाना जाता है पातालपानी

अंग्रेज अधिकारी टंट्या मामा के अदम्य साहस को स्वीकार करते थे और उनके नाम से थर्राते भी थे। टंट्या मामा निर्धनों की मदद के लिए सक्रिय रहते थे। उनकी गतिविधियों से अंग्रेज अधिकारी खौफ भी खाते थे। इसलिए बहुत से अंग्रेज अधिकारियों द्वारा टंट्या मामा को इंडियन रॉबिन हुड भी कहा गया था।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे टंट्या भील

बताते हैं कि अनेक तरह के पशु-पक्षियों की आवाज निकालने में माहिर टंट्या मामा ने खुशी-खुशी फांसी के फंदे को चूमा था। उनसे अंग्रेज सैनिक थर्राते थे। उन्होंने देश के स्वाभिमान और स्वतंत्रता के मूल्य से लोगों को अवगत करवाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बहुत जतन किए। सभी के श्रद्धा के केंद्र, जनजातीय गौरव, देश के स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक, क्रांतिकारी बलिदानी टंट्या मामा सभी के लिये पूज्य हैं।

आज भी सुनाई जाती हैं टंटया मामा की साहस गाथाएं

जननायक टंट्या मामा साहस और शौर्य के प्रतीक रहे हैं। निमाड़ और मालवा अंचल में उनके योगदान की गाथाएं घर-घर में सुनी और सुनाई जाती हैं। वर्ष 1842 में जन्मे देश भक्त जननायक टंट्या मामा को 1889 में ब्रिटिश सत्ता द्वारा फाँसी दे दी गई थी। टंट्या भील सिर्फ 47 वर्ष जीवन जिए, लेकिन कार्य दो सदियों का कर गए। उन्होंने जनजातीय समाज में आपसी विवादों को सुलझाने में भी अहम भूमिका निभाई थी, वे सच्चे अर्थों में जननायक थे। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने टंट्या भील के योगदान पर केंद्रित नाटक का मंचन करवाया है।

गौरव यात्रा

जननायक टंट्या मामा के बलिदान दिवस के पूर्व खंडवा ज़िले के बड़ौद अहिर और रतलाम ज़िले से निकली दो गौरव यात्रा इंदौर शहर में प्रवेश करेंगी, जिनका समागम धार में हो रहा है। ये यात्राएं सम्मिलित रूप से इंदौर में राजवाड़ा पहुँचकर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समाप्त होगी। चार दिसंबर की सुबह लगभग नौ बजे यात्रा नेहरू स्टेडियम से प्रारंभ होकर भंंवरकुंआ चौराहा इंदौर पहुँचेगी। इस चौराहे का नामकरण टंट्या भील चौराहा के नाम पर समारोहपूर्वक किया जाएगा। कार्यक्रम में नामकरण के शिलालेख का अनावरण भी होगा। यहीं से लगभग 5 हज़ार की संख्या में मोटर साइकिल रैली भी निकलेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay