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Health news: बड़े अस्पतालों में कम और ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों से ज्यादा आ रहे हैं म्यूकर माइकोसिस के मामले

Updated: | Wed, 12 May 2021 05:46 PM (IST)

Health news: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिन अस्पतालों में स्टेरॉयड देने में प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है वहां ब्लैक फंगस के मामले कम देखने को मिल रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र और छोटे जिलों के अस्पतालों में स्टेरॉयड लगाने को लेकर कोई मापदंड नहीं है। इस वजह से वहां से ज्यादा मामले रेफर होकर भोपाल आ रहे हैं। मसलन एम्स भी कोविड अस्पताल है, लेकिन यहां भर्ती मरीजों में अभी तक 3-4 में ही यह बीमारी देखने को मिली है। हमीदिया में इस बीमारी वाले 6 मरीज भर्ती हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि सीहोर, विदिशा और रायसेन सेइस बीमारी से पीड़ित लोग रेफर होकर हमीदिया अस्पताल आ रहे हैं। हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों में सिर्फ एक ही भोपाल का है।हमीदिया अस्पताल की नाक कान एवं गला रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ स्मिता सोनी का कहना है कि अब लोगों में जागरूकता आई है। म्यूकर माइकोसिस के मामूली लक्षण दिखने पर भी लोग अस्पताल आ रहे हैं। तीन से चार दिन पहले तक यही स्थिति थी कि बहुत ज्यादा बीमारी बढ़ने के बाद लोग अस्पताल आ रहे थे। उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह बीमारी नाक में पहुंचती है। इसके बाद आंख और फिर दिमाग में पहुंचती है। शुरू में ध्यान दिया जाए तो आंख और दिमाग में बीमारी पहुंचने से बचाया जा सकता है।हमीदिया अस्पताल के छाती एवं स्वास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ लोकेंद्र दवे का कहना है की कोरोना ठीक होने के बाद भी इस बीमारी का खतरा बना रहता है। ऐसे में डायबिटीज वाले मरीज खासतौर पर जिन्हें कोरोना संक्रमण के दौरान स्टेरॉयड दिया गया है उन्हें बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। हर दिन खाने के पहले और खाने के बाद घर में ग्लूकोमीटर से शुगर की जांच जरूर करते रहें।

Posted By: Ravindra Soni
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