दूसरे राज्यों में संविदाकर्मियों के नियमितीकरण की राहें खुली तो मप्र में बढ़ी बैचेनी

मप्र में है 1.20 लाख संविदाकर्मी, 75 फीसद को हो चुके हैं 15 वर्ष से अधिक का समय।

Updated: | Mon, 17 Jan 2022 04:18 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में संविदाकर्मियों को नियमित करने की राहें खुल गई हैं। वहां के संविदाकर्मियों में उत्साह है। इसके विपरित मप्र के संविदाकर्मियों में बैचेनी बढ़ गई है। यहां नियमितीकरण के नाम पर कोई हलचल नहीं है। इससे अलग संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर भर्ती का मौका देने से जुड़े नियमों का भी ठीक से पालन नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं। प्रदेश में 1.20 लाख से अधिक संविदाकर्मी हैं। ये लगातार नियमित करने की मांग कर रहे हैं। पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में संविदाकर्मियों को नियमित करने की घोषणाएं हुई हैं।

75 फीसद संविदाकर्मी 15 वर्ष से दे रहे सेवाएं

प्रदेश में 1.20 लाख संविदाकर्मी हैं। ये लगभग सभी विभागों में राजधानी से लेकर जिलों में सेवाएं दे रहे हैं। खासकर स्वास्थ्य महकमें में अधिक संविदाकर्मी हैं। मप्र संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ व अन्य संगठनों के प्रतिनिधि दावा करते रहे हैं कि 1.20 लाख संविदाकर्मियों में से 75 फीसद को सेवा देते हुए 15 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है तब भी इनके भविष्य की चिंता नहीं की जा रही है।

मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से की मांग

प्रदेश के संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए संगठनों की तरफ से कई बार मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से मांग की जा चुकी है। हाल में कृषि मंत्री कमल पटेल से भी संविदाकर्मियों ने मुलाकात की थी। अलग-अलग संगठनों द्वारा अपने-अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र इकाई में कार्यरत संविदाकर्मियों ने मोर्चा खोल दिया था। जमकर विरोध हुआ था। काम बंद की स्थिति बन गई थी। मप्र संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि ऐसा कोई स्तर नहीं है जहां संविदाकर्मियों को नियमित करने की बात नहीं रखी है लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं खुला है। राठौर ने बताया कि पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में संविदाकर्मियों के प्रति सहानुभूति पूर्वक अच्छा निर्णय लेने की घोषणा हुई है। मप्र के संविदाकर्मियों को भी नियमित किया जाना चाहिए। फिर से यह मांग दोहराई जाएंगी।

Posted By: Lalit Katariya