मध्‍य प्रदेश में अब कलेक्टर तय करेंगे सहकारी समितियों से कितनी बिकेगी खाद, आंतरिक व्यवस्था बनाने दिए अधिकार

Updated: | Mon, 25 Oct 2021 08:52 PM (IST)

भोपाल। (राज्य ब्यूरो)। प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से कितनी खाद बिकेगी, यह अब कलेक्टर तय करेंगे। अभी अधिकांश जिलों में 70 फीसद खाद समितियों के माध्यम से विक्रय की जा रही है। वहीं, कुछ जिलों में 50 फीसद खाद निजी क्षेत्र के माध्यम से विक्रय हो रही है। मुरैना के बाद अब सागर संभाग में बोवनी बढ़ने के साथ मांग में वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए कलेक्टरों को आंतरिक व्यवस्था बनाने के निर्देश कृषि विभाग ने दिए हैं। अभी प्रदेश में एक लाख 40 हजार टन डीएपी और चार लाख टन यूरिया उपलब्ध है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रबी फसलों की बोवनी का काम धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है। सागर संभाग में चना और गेहूं की बोवनी का काम तेज हो गया है। इसके कारण डीएपी की मांग भी बढ़ रही है। पिछले साल अक्टूबर में हुई बिक्री के आधार पर 90 प्रतिशत जिलों को खाद उपलब्ध कराई गई है। इसके बाद भी जहां से मांग आ रही है, वहां उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति कराई जा रही है।

अशोक नगर में भी खाद के लिए किसान लाइन लगाकर घंटों खड़े रहे। जब खाद की पर्ची किसानों को नहीं मिली तो उन्होंने नारेबाजी की और वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी को घेर लिया। जबकि, अशोक नगर में सरसों की बोवनी का क्षेत्र 25 से 30 हजार हेक्टेयर है। यहां चना और गेहूं की बोवनी का काम अब धीरे-धीरे प्रारंभ हो रहा है लेकिन किसान खाद का भंडार करके रखना चाहते हैं।

यही वजह है कि दुकानों पर भीड़ लग रही है और इससे अव्यवस्था भी फैल रही है। इसके मद्देनजर अब तय किया है कि जिले में सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों से कितनी मात्रा में खाद बिकेगी, यह कलेक्टर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय करेंगे। विभाग ने यह अधिकार कलेक्टरों को दिए हैं। उधर, सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समितियों से पात्र किसानों को सामग्री ऋण के तौर पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay