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Madhya Pradesh Assembly by-elections: किसान कर्जमाफी का मुद्दा बढ़ा रहा कांग्रेस की मुसीबत

Updated: | Thu, 29 Oct 2020 06:14 AM (IST)

Madhya Pradesh Assembly by-elections धनंजयप्रताप सिंह भोपाल (नईदुनिया)। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए गेमचेंजर साबित होने वाला किसान कर्जमाफी का मुद्दा ही उपचुनाव में उसकी मुसीबत बढ़ा रहा है। किसान बाहुल्य वाले विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों को किसानों को कर्जमाफी के मुद्दे पर समझाना मुश्किल हो रहा है। प्रदेश में 28 विधानसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस तमाम तरह की सफाई दे रही है, लेकिन दस दिन में किसानों का कर्ज माफ करने की बात का वह जवाब नहीं दे पा रही है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान हर चुनावी सभा में कहा करते थे कि कांग्रेस की यदि राज्य में सरकार बनी तो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा।उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री को बदलने से भी नहीं हिचकेंगे। इधर, भाजपा भी उपचुनाव में इस मुद्दे को हवा दे रही है।

पहली फाइल कर्जमाफी की पास

मध्य प्रदेश में साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में किसानों की कर्जमाफी को कांग्रेस पार्टी ने बड़ा मुद्दा बनाया था। इसी चुनावी वादे (वचन) की बदौलत कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता के वनवास को खत्म करने में कामयाब रही थी।

दिसंबर 2018 में कमल नाथ ने मुख्यमंत्री बनने के एक घंटे अंदर किसानों की कर्जमाफी से जुड़ी फाइल को पास कर दिया था, लेकिन 15 महीने के बाद सियासत ने ऐसी करवट ली कि कमल नाथ विपक्ष में और शिवराज सत्ता में हैं।

आरोप-प्रत्यारोप अब भी जारी

उपचुनाव से कुछ दिन पहले ही शिवराज सरकार उस समय असहज हो गई थी, जब सितंबर में विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान सरकार ने यह स्वीकार किया है कि कमल नाथ की सरकार में कर्जमाफी हुई थी। सरकार ने विधानसभा में लिखित उत्तर में स्वीकार किया है कि अब तक किसान कर्जमाफी के 20 लाख 23 हजार 136 प्रकरणों में 7108 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है।

कृषि मंत्री कमल पटेल ने सदन में कहा था कि 26.95 लाख किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ हुआ है। इसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को खूब हवा दी, लेकिन उपचुनाव के प्रचार में कांग्रेस इस पर प्रामाणिक तौर पर अपनी बात रखने और मतदाताओं को समझाने में विफल साबित हुई है।

इनका कहना है

कांग्रेस को कोई दिक्कत नहीं आ रही है। मप्र सरकार ने खुद विधानसभा में स्वीकारा है कि 26 लाख किसानों की कर्जमाफी हो गई है। जब सरकार ही स्वीकार रही है और बाहर आकर झूठ बोल रही है तो किसानों को सब मालूम है।

केके मिश्रा, मीडिया प्रभारी, ग्वालियर-चंबल संभाग

कमल नाथ और कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि प्रदेश के सभी किसानों के सभी कर्ज माफ होंगे। प्रदेश का एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां सभी किसानों के कर्ज माफ हुए हों। इससे प्रदेश का किसान खुद को ठगा महसूस कर रहा है, वह कांग्रेस के झूठ का करारा जवाब देगा।

डा. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता, मप्र भाजपा

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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