मध्य प्रदेश में महिला सिपाही बनेगी पुरुष, सरकार ने दी लिंग परिवर्तन कराने की अनुमति

Updated: | Thu, 02 Dec 2021 08:36 AM (IST)

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। राज्य शासन ने प्रदेश के एक जिले में पदस्थ महिला आरक्षक को लिंग परिवर्तन करवाने की अनुमति दे दी है। करीब तीन साल चली विधिक प्रक्रिया के बाद गृह विभाग ने बुधवार को आरक्षक को इसकी अनुमति दी। अब पुलिस मुख्यालय इस संबंध में अलग से आदेश जारी करेगा। महिला आरक्षक को बचपन से 'जेंडर आइडेंटिटी डिसआर्डर' है। इसकी पुष्टि राष्ट्रीय स्तर के तीन मनोचिकित्सकों ने की। इस आधार पर आरक्षक ने वर्ष 2019 में भारत सरकार के राजपत्र में लिंग परिवर्तन करवाने की मंशा की अधिसूचना प्रकाशित करवाई। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है। इसके बाद आरक्षक ने पुलिस मुख्यालय को इस संबंध में आवेदन दिया। वर्तमान में आरक्षक पुरुषों की भांति काम कर रही है।

मध्य प्रदेश में शासकीय स्तर पर मंजूरी का यह पहला मामला

यह हैं प्रविधान : लिंग परिवर्तन करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में एक फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि कौन क्या रहना चाहता है? यह उसकी स्वतंत्रता है। इसी को आधार बनाकर महिला आरक्षक ने आवेदन किया।

ऐसे चली प्रक्रिया : आवेदन से पूर्व आरक्षक ने अपनी मंशा का अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाया। भारत के राजपत्र में इस मंशा की अधिसूचना के प्रकाशन के बाद पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया। प्रारंभिक परीक्षण के बाद पुलिस अधीक्षक ने आवेदन पुलिस मुख्यालय को भेजा और वहां से शासन को भेजा गया। आरक्षक ने आवेदन के साथ राष्ट्रीय स्तर के तीन मनोचिकित्सक और लिंग परिवर्तन करने वाले चार डाक्टरों की रिपोर्ट लगाई। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में लिंग परिर्वतन करवाने वाले दोनों कर्मचारियों के केस का भी हवाला दिया। विभाग ने आवेदन पर पहले जिले में छानबीन करवाई। महिला आरक्षक के रिश्तेदार, स्वजन और मित्रों से बात की गई। विधि विभाग से परामर्श लिया गया। सभी जगह से संतुष्ट होने के बाद गृह विभाग ने लिंग परिवर्तन करवाने की अनुमति दी।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में भी मिल चुकी है अनुमति

सरकारी नौकरी में रहते लिंग परिवर्तन करवाने का यह प्रदेश में पहला और देश में तीसरा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस में एक महिला और उत्तर प्रदेश में रेलवे के पुरुष अधिकारी ने लिंग परिवर्तन करवाया है।

देश की शीर्ष अदालत ने अपने विभिन्न् न्याय दृष्टांतों में व्यक्ति की निजता की रक्षा पर जोर दिया है। इसी प्रविधान के तहत व्यक्ति स्वयं या शासकीय स्तर पर किसी निजी निर्णय के परिपेक्ष्य में उसका नाम गुप्त रखा जा सकता है। -ब्रह्मानंद पांडे, अधिवक्ता मप्र हाईकोर्ट

प्रारंभ में महिला आरक्षक में पुरुष जैसे लक्षण्ा प्रतीत हुए। डाक्टरों ने उसे लिंग परिवर्तन करवाने की सलाह दी थी। दिल्ली के एक मनोचिकित्सक, गांधी मेडिकल कालेज, भोपाल और जयारोग्य अस्पताल ग्वालियर के डाक्टरों की सलाह भी इसी तरह की आई। लिंग परिवर्तन व्यक्ति का स्वयं का अधिकार है इसलिए सरकार ने अनुमति दी है। - डा. नरोत्तम मिश्रा, गृह मंत्री, मध्य प्रदेश

विशेषज्ञों की राय

कुछ महिला-पुरुष शारीरिक रूप से भले ही अपने मूल रूप में दिखते हैं, लेकिन उनमें हार्मोंस विपरीत लिंग वाले ज्यादा होते हैं। जेनेटिक और सामाजिक तौर पर उनका लगाव विपरीत लिंग की तरह व्यवहार करने का रहता है, लेकिन वह अपनी बात समाज के सामने नहीं रख पाते और कुंठित होते हैं। लिंग परिवर्तन के पहले स्त्री अंडे और पुरुष स्पर्म सुरक्षित कर लें तो सरोगेसी के जरिए संतान पैदा कर सकते हैं। -डा. सत्यकांत त्रिवेदी , मनोचिकित्सक

लिंग परिवर्तन में सर्जरी कर जननांग भी बनाए जाते हैं। इससेसंबंध बनाने की क्षमता कुछ हद तक आ जाती है, लेकिन इसके लिए बहुत एडवांस सर्जरी करनी पड़ती है पर संतान उत्पत्ति की क्षमता विकसित नहीं होती। -डा. आनंद गौतम, प्राध्यापक, प्लास्टिक सर्जरी

लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया अचानक नहीं हो सकती है। पुरुष को महिला या महिला को पुरुष बनाने के लिए हार्मोन में बदलाव की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। प्राकृतिक तौर पर पुरुषों में टेस्टोस्टरान और महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिकता होती है। जब कोई महिला पुरुष बनती है तो उसे टेस्टोस्टरान और पुरुष महिला बनता है तो उसे एस्ट्रोजन हार्मोन का इंजेक्शन दिया जाता है। इससे उनका व्यवहार लिंग के अनुरूप बदलता है। आवाज में बदलाव आता है। टेस्टोस्टरान से शारीरिक मजबूती भी आती है। यह प्रकिया पूरी होने के बाद सेक्सुअल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी प्लास्टिक सर्जन कई चरण में करते हैं, लेकिन प्रजनन की प्रक्रिया नहीं हो सकती। -डा. रुचि सोनी, सहायक प्राध्यापक मनोचिकित्सा, जीएमसी भोपाल

Posted By: Prashant Pandey