Madhya Pradesh News: योजना के क्रियान्वयन में हुई गड़बड़ी, केंद्र सरकार को लौटाने पड़ेंगे 58 करोड़ रुपये

Updated: | Wed, 28 Jul 2021 10:45 PM (IST)

कांग्रेस सरकार के समय कृषि विभाग ने बनाई थी विधायकों की समिति, पर नहीं हुई कोई कार्रवाई

भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत तौर-तरीकों से खेती करने वाले अनुसूचित जनजाति के किसानों को प्रशिक्षण देने से लेकर प्रसंस्करण आदि कार्यों के क्रियान्वयन में गड़बड़ी सरकार को भारी पड़ रही है। केंद्र सरकार जनजातीय कार्य विभाग से राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र योजना के प्रविधानों के मुताबिक मांग रहा है, पर इसका पालन ही नहीं हुआ। इसके कारण करीब 58 करोड़ रुपये का मामला उलझ गया है।

योजना में गड़बड़ी के आरोप कांग्रेस सरकार के समय पार्टी के ही विधायकों ने लगाए थे। इसको लेकर विधायकों की समिति भी गठित हुई थी लेकिन यह निष्क्रिय है। प्रदेश के मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, दतिया, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और मंडला जिले में योजना लागू हुई थी। जनजातीय कार्य विभाग ने राशि उपयोग करने के लिए कृषि विभाग को दी थी।

योजना के तहत राशि का उपयोग बायोलॉजिकल नाइट्रोजन, हरी खाद के प्रयोग के लिए सहायता, तरल जैविक उर्वरक सहायता, प्रसंस्करण आदि के लिए होना था। किसानों को जो खाद दी गई, वो घटिया गुणवत्ता की थी। पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने इसे लेकर ध्यानाकर्षण लगाया था। सदन में मामला आया तो तत्कालीन अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने समिति बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए थे।

कृषि विभाग ने मार्को के अलावा सुनील सराफ, योगेंद्र सिंह, प्रताप ग्रेवाल, विजय राघवेंद्र सिंह, नीलांशु चतुर्वेदी, संजय उइके सहित अन्य की समिति गठित की थी, लेकिन इसकी बैठकें ही नहीं हुईं। पिछले दिनों आनलाइन बैठक होने की सूचना दो घंटे पहले दी गई थी। इसके बाद क्या हुआ कोई जानकारी नहीं है।

उधर, जनजातीय कार्य विभाग 58 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को लौटाने के पक्ष में है क्योंकि बार-बार योजना के प्रविधान के अनुसार उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। इसको लेकर वित्त विभाग से विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया है। पिछले दिनों मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने भी इस मामले में बैठक की थी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay