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Madhya Pradesh News: जंगल में तब्दील हुई पथरीली पहाड़ी, अब भोपाल को दे रही ऑक्सीजन

Updated: | Tue, 22 Jun 2021 07:17 AM (IST)

Madhya Pradesh News: हरिचरण यादव, भोपाल। भोपाल शहर के बीचों-बीच स्थित 481 हेक्टेयर में फैली पथरीली पहाड़ी (कटारा हिल्स) 15 साल में जंगल तब्दील हो गई है। इसमें 50 अलग-अलग प्रजाति के करीब ढाई लाख फलदार और छायादार पेड़ हैं। इनमें से कुछ अभी छोटे हैं। ये सभी मिलकर भोपाल शहर की 28 लाख की आबादी को 24 घंटे ऑक्सीजन दे रहे हैं इसलिए जंगल का नाम ऑक्सीजन बैंक पड़ गया है। वैसे इसका मूल नाम इकोलॉजिकल पार्क है। आबादी के बीचों-बीच विकसित हुए इस जंगल में सुबह-शाम सैकड़ों लोग घूमने के लिए आते हैं। यह जंगल प्राकृतिक रूप से हिरण और चीतल प्रजाति के वन्यप्राणियों का आवास भी बनता जा रहा है।

15 साल पहले वीरान थी पहाड़ी

शहर के कटारा हिल्स क्षेत्र से लगा लहारपुर इलाका है। इसकी सीमा रायसेन जिले से लगती है, जिसकी लंबाई करीब 20 किलोमीटर है। कटारा हिल्स इलाका पहले एकांत क्षेत्र था और मुख्य शहर से दूर माना जाता था। पथरीला इलाका होने के कारण प्राकृतिक रूप से लगे पौधे व पेड़ों की संख्या कम थी, जो थे उन्हें काटा जा रहा था, जगह-जगह अवैध खनन हो रहा था।

भोपाल वन वृत्त में मुख्य वन संरक्षक रहे डॉ. एसपी तिवारी बताते हैं कि शहर की आबादी बढ़ी तो घने वन क्षेत्र की आवश्यकता महसूस होने लगी। इसके चलते 1997 में वन विभाग ने अपने इस जंगल को संरक्षित करने के प्रयास तेज किए थे। नतीजा यह रहा कि 2006 में लहारपुर वन क्षेत्र को इकोलॉजिकल पार्क का दर्जा देकर तीन हिस्सों में बांट दिया गया।

इसी के पहले हिस्से में 481 हेक्टेयर पहाड़ी जमीन है जिस पर पीपल, बरगद, नीम, पलाश, हर्र, बहेड़ा, आंवला, गुलमोहर, महुआ, बांस, लेंडिया, सागोन, सतपर्णी, बेलपत्र जैसी प्रजाति के 1.40 लाख पौधे लगाए गए थे, जिनकी उम्र अब पांच से 15 साल तक हो चुकी है। पौधारोपण के साथ यहां एक लाख से अधिक पौधे प्राकृतिक रूप से विकसित हुए, जिनका संरक्षण किया जा रहा है। पथरीली जमीन पर जंगल विकसित करने के लिए वन विभाग ने पिछले 15 साल में सात करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह राशि पौधे लगाने, उन्हें गर्मी में पानी देने, पौधे और पेड़ों की सुरक्षा करने पर खर्च की गई है।

अब जंगल सफारी की तैयारी

भोपाल के जिला वन अधिकारी हरिशंकर मिश्रा कहते हैं कि इकोलॉजिकल पार्क के तीनों चरणों को और विकसित करेंगे। साथ ही यहां जंगल सफारी शुरू करेंगे। भोपाल के वनस्पति जगत पर पहली पीएचडी करने वाले डॉ. सुदेश वाघमारे बताते हैं कि देश के किसी भी शहर और किसी भी राजधानी के पास इकोलॉजिकल पार्क जैसा बड़ा और घना जंगल नहीं है। यह पार्क भोपाल के लिए ऑक्सीजन बैंक है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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