मध्य प्रदेश में दसवीं में खराब प्रदर्शन करने वाले शासकीय स्कूलों में नियुक्त किए मेंटर

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 09:43 AM (IST)

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) की दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षाएं 17 व 18 फरवरी से शुरू होने वाली हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस साल का परीक्षा परिणाम बेहतर करने की कवायद शुरू कर दी है। तिमाही परीक्षा का परिणाम बेहतर न होने कारण स्‍कूल शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षा के परिणाम को सुधारने के लिए मेंटर नियुक्त किए हैं। कोरोना के कारण इस बार भी पढ़ाई प्रभावित हुई है। इस कारण तिमाही परीक्षा में दसवीं में 51 फीसद और बारहवीं में करीब 30 फीसद विद्यार्थी फेल हुए हैं। बोर्ड परीक्षा में करीब ढाई माह का समय है। ऐसे में विभाग परीक्षा परिणाम बेहतर करने की कोशिश में जुट गया है। विभाग ने पिछले तीन सालों से जिन स्कूलों का परिणाम 40 फीसद से कम रहा है, ऐसे स्कूलों को चिह्नित कर वहां पर मेंटर तैनात किए हैं। यह जिम्मेदारी ब्लाक शिक्षा अधिकारी सहित वरिष्ठ शिक्षकों को दी गई है। ये आगामी बोर्ड परीक्षा परिणाम के लिए जवाबदेह भी होंगे। नौवीं से बारहवीं तक की छमाही परीक्षाएं 29 नवंबर से शुरू होने वाली है।

यहां पर यह बता दें, कि पिछले साल प्रदेश के करीब 4500 स्कूलों का दसवीं में परिणाम 40 फीसद से कम था। इन स्कूलों के 10,200 शिक्षकों को दक्षता परीक्षा भी देनी पड़ी थी।

इस तरह मेंटर्स निभाएंगे भूमिका

मेंटर्स को सप्ताह में दो बाद स्कूल में भ्रमण करना होगा। प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थियों को प्रेरित करेंगे और परीक्षा की तैयारियों का जायजा लेंगे। हर 15 दिन में प्राचार्य सहित अन्य अधिकारियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। वाट्सएप पर शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से दूसरी से आठवीं कक्षा के शिक्षकों के लिए अंग्रेजी साक्षरता कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण का आयोजन वाट्सएप के जरिए किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक प्राथमिक और माध्यमिक कक्षा के एक-एक शिक्षक को चुना गया है।

रेमेडियल कक्षाएं लगाई जाएंगी

स्कूलों में दसवीं व बारहवीं कक्षा का पाठ्यक्रम पूरा होने की स्थिति में है। ऐसे में अब दिसंबर से रेमेडियल कक्षाएं लगाई जाएंगी। इन कक्षाओं में नए पैटर्न पर आधारित ब्लू प्रिंट से भी तैयारी कराई जाएगी। जिन विद्यार्थियों का परफार्मेंस खराब होगा, उन्हें अलग से भी पढ़ाया जाएगा।

जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम 40 फीसद से कम रहा है। उन स्कूलों के लिए मेंटर नियुक्त किया गया है, ताकि बोर्ड परीक्षा की तैयारी किया जा सके।

- नितिन सक्सेना, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल

Posted By: Ravindra Soni