मध्य प्रदेश में मंत्रालय कर्मचारी संघ के चुनाव अमान्य

Updated: | Mon, 29 Nov 2021 02:11 PM (IST)

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मंत्रालयीन (सचिवालयीन) कर्मचारी संघ का चुनाव विवादों में घिर गया है। नेता सुभाष चंद्र बोस पैनल ने तय कार्यक्रम से चार दिन पहले चुनाव भी कर लिए और कार्यकारिणी की घोषणा भी कर दी। इतना ही नहीं, पंजीयक फर्म्स एंड सोसायटी के समक्ष चुनाव की जानकारी (धारा-27) भी पेश कर दी। अब कहा जा रहा है कि पंजीयक ने उनके चुनाव को वैधानिक मान लिया है, जबकि स्थिति अलग है। पंजीयक आलोक नागर का कहना है कि धारा-27 की जानकारी की प्रतिलिपि को कर्मचारी मान्यता मान लेते हैं। ये वैधानिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। सिर्फ प्रमाणित प्रतिलिपि है, जो पत्र पर लिखा भी जाता है। फर्म्स एंड सोसायटी मान्यता नहीं देती है।

मंत्रालय में कर्मचारियों के सुभाषचंद्र बोस और सरदार पटेल पैनल सक्रिय हैं। हर बार इन दोनों पैनलों के बीच चुनावी मुकाबला होता है। इस बार चुनाव शुरुआत से ही विवाद में घिरे हुए हैं। दरअसल, सुधीर नायक की अगुआई में गठित कार्यकारिणी का कार्यकाल फरवरी 2021 में पूरा हो चुका है। 19 मार्च 2021 को संघ के विधिवत चुनाव कराने की अधिसूचना भी जारी हो गई थी और सेवानिवृत्त कर्मचारी संतोष ठाकुर को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया था, पर कोरोना की वजह से दोनों पक्षों की सहमति से चुनाव रद कर दिए गए। संघ के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार पटेल बताते हैं कि कोरोना की स्थिति सामान्य होने और सरकार द्वारा सभी प्रतिबंध हटा लिए जाने के बाद भी जब चुनाव अधिकारी ने दोबारा चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया तो 27 अक्टूबर 2021 को पुरानी अधिसूचना रद कर दी गई। इसके साथ ही पूर्व में नियुक्त किए गए चुनाव अधिकारी का काम भी समाप्त हो गया।

चुनाव अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा : पटेल बताते हैं कि संघ ने विधिवत चुनाव कराने के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी भगवान सिंह यादव को चुनाव अधिकारी बनाया और उन्होंने चुनाव कार्यक्रम भी घोषित कर दिया। इस बीच पूर्व चुनाव अधिकारी संतोष ठाकुर ने चुनाव करा दिए। उन्हें इस मामले में कानूनी नोटिस भी दिया है। उन्होंने बताया कि चुनाव में इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि नामांकन फार्म लेने, जमा करने और नाम वापस लेने के लिए एक ही दिन दिया। इतना ही नहीं, निर्वाचित कार्यकारिणी द्वारा अध्यक्ष का निर्वाचन भी तय तारीख से चार दिन पहले कर लिया। संघ के विधान के अनुसार 14 दिसंबर को चुनाव होना है, जिसकी तैयारी चल रही है।

क्या कहते हैं संघ पदाधिकारी

जिस चुनाव को अवैध बताया जा रहा है। उसके लिए चुनाव अधिकारी इन्हीं ने नियुक्त किया था। उनकी निष्पक्षता से डरकर चुनाव में भाग नहीं लिया। अब नए चुनाव की नौटंकी करके संघ को विवादित करना चाहते हैं। चुनाव में पराजय पक्की थी। - सुभाष वर्मा, संघ के नवनियुक्त अध्यक्ष

संघ के संविधान में नियम है कि कार्यकारिणी जिस विधि, रीति और स्थान पर चाहे चुनाव करा सकती है। कोरोना के कारण दोनों पक्षों की सहमति से मार्च 2021 में चुनाव टाले गए थे। जब सात माह चुनाव अधिकारी ने चुनाव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया, तो हमने 27 अक्टूबर को पुरानी अधिसूचना रद कर दी। इसी के साथ चुनाव अधिकारी भी हट गए। फिर वे चुनाव कैसे करा सकते हैं। - आलोक वर्मा, संघ के कार्यवाहक सचिव

Posted By: Prashant Pandey