Naidunia Column Vaibhav Sridhar: शुभ घड़ी का इंतजार

Updated: | Sat, 31 Jul 2021 01:02 PM (IST)

Naidunia Column Vaibhav Sridhar: प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां जोरों पर हैं। राजनीतिक दल उपचुनाव की तैयारियों को लेकर बैठकें कर रहे हैं तो प्रशासनिक स्तर पर तबादलों की जोर-शोर से तैयारी चल रही है। दरअसल, एक जुलाई से स्थानांतरण पर प्रतिबंध हटाया गया है लेकिन ज्यादातर विभागों में अभी तक तबादले नहीं हुए हैं। सरकार ने विभागों को अब एक सप्ताह की मोहलत और दे दी है। उधर, आइएएस अधिकारियोें की बैचेनी भी बढ़ती जा रही है क्योंकि तबादले मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक होने हैं। इसमें लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव के साथ नगरीय निकाय चुनाव को ध्यान में रखकर जमावट की जानी है। यही वजह है कि वरिष्ठ स्तर पर दो-तीन बार मंथन होने के बाद भी तबादला सूची जारी नहीं हो पाई है। जबकि, वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में परिवर्तन की सूची लगभग तैयार है पर लगता है कि शुभ घड़ी का इंतजार हो रहा है।

अरमानों पर पानी फिरना तय

राज्य निर्वाचन आयोग प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव कराने की तैयारियों में जुटा है। पिछले दिनों निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने इसे लेकर समीक्षा की और अधिकारियों को बताया दिया कि पहले नगरीय निकाय और फिर पंचायत चुनाव होंगे। निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे। इसमें पार्षद ही महापौर-अध्यक्ष चुनेंगे। जबकि, कोरोना की तीसरी लहर की आशंका और आरक्षण का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते सरकार भी यह दावे के साथ नहीं कह पा रही है कि प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव कब होंगे। दरअसल, अधिकारी जानते हैं कि चुनाव को लेकर जो पेंच फंसे हैं कि उन्हें सुलझाने में वक्त लगेगा। विभागीय मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी इसके संकेत दे दिए हैं। यही वजह है कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारी खामोश हैं। इस स्थिति को देखकर लगता है कि एक बार फिर आयोग के अधिकारियों के अरमानों पर पानी फिरना तय है।

हमारा काम तो हमें ही करने दो

प्रदेश में निर्माण कार्य गुण्ावत्तायुक्त हों, इसके लिए सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआइयू) का गठन किया है। मंशा साफ थी कि एक एजेंसी रहने से निगरानी अच्छे से हो पाएगी और काम भी समयसीमा में पूरे होंगे। मगर हो उलटा रहा है। अधिकांश विभागों ने अपने स्तर पर निर्माण कार्य कराने शुरू कर दिए हैं। हालात यह हो गई है कि विभाग जो काम इकाई को दे चुके हैं, उन्हें भी वापस ले रहे हैं। इससे इकाई के औचित्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने आपत्ति उठाई कि जो काम हमारा है, वो तो हमें ही करने दिया जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी जायज माना और तय कर दिया कि निर्माण कार्यों की एजेंसी इकाई ही रहेगी। हालांकि, इससे वे एजेंसियां दुखी हैं, जिन्होंने काफी जतन से काम हासिल किए थे।

श्रेय की राजनीति बनी रोड़ा

कर्मचारी संगठन इन दिनों काफी मुखर हैं। महंगाई भत्ते में वृद्धि को लेकर आंदोलन भी कर रहे हैं। हालांकि इनमें एकजुटता की कमी सफलता की राह में रोड़ा बन रही है। दरअसल, पिछले दिनों सामूहिक अवकाश लेकर सरकार पर दवाब बनाने की रणनीति बनाई गई थी। उम्मीद थी कि सभी कर्मचारियों से जुड़े संगठन इस मामले में एकजुट होंगे और प्रभावी असर छोड़ेंगे पर ऐसा नहीं हुआ। कुछ संगठनों ने इससे दूरी बनाकर रखी। इसके कारण आंदोलन की जो धमक होनी चाहिए थी, वो नहीं हो पाई। दरअसल, कर्मचारी संगठनों में भी वर्चस्व की लड़ाई है। इसकी वजह कोई किसी को श्रेय नहीं लेने देना चाहता है। मंत्रालय में ही कर्मचारी दो-तीन धड़ों में बंटे हैं। यदि एक धड़ा आंदोलन करता है तो दूसरा सैद्धांतिक तौर पर मांग के साथ होने के बाद भी दूरी बना लेता है। इसका खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है जो अपना हक चाहते हैं।

Posted By: Lalit Katariya