Navdunia Deepak Vishwakarma Column: जमने लगी है पुराने अफसरों की वापसी की बिसात

Updated: | Tue, 03 Aug 2021 02:57 PM (IST)

Navdunia Deepak Vishwakarma Column: दीपक विश्‍वकर्मा, भोपाल। राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों पुराने अफसरों की वापसी की किस्से गुंजायमान हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे अफसर जो अपने तीन साल का समय अन्यत्र बिता चुके हैं, वे अब एक बार फिर जिला प्रशासन के गलियारे की तरफ झांककर अपनी वापसी वाला आदेश जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए पूरी बिसात भी जम गई है। जैसे ही आदेश होगा, सभी अपने पुराने स्थान पर विराजमान होकर जिला प्रशासन को मजबूती प्रदान करेंगे। पीआरसी द्वारा एक सूची तैयार की जा रही है। जिसमें अधिकारियों के स्थानांतरण होने है। आदेश में न केवल जिला प्रशासन के पुराने धुरंधर, बल्कि अपने काम में माहिर अफसरों की भी पोस्टिंग भोपाल में होने वाली है। वहीं वर्तमान में सेवा दे रहे कुछ ऐसे अफसर जो काफी वरिष्ठ हो चुके हैं, उन्हें जिले से अन्यत्र कहीं स्थानांतरित किए जाने की कवायद तेज हो गई है।

करे कोई, भरे कोई

राजधानी में विगत दिनों एक अफसर के खिलाफ पोस्टर चिपकाने का मामला इंटरनेट मीडिया में खूब धूम मचा रहा था। वहीं लोकायुक्त सहित अन्य जगह शिकायत के बाद जो किस्से सामने आए, उनके बाद अब नई कहानी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अपने ही अफसर के खिलाफ इस तरह का अभियान चलाने वाले खुद उसी तहसील में पदस्थ हैं, जिन्होंने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस तरह की साजिशें रची थीं। कहा तो यह भी जा रहा है कि इन लोगों की यहां के बिल्डर और रसूखदारों के साथ गहरी मित्रता है। यही कारण है कि अफसर द्वारा किसी काम से मना किए जाने के बाद वे अफसर को ही हटवाने पर आमादा हो गए। बताया जा रहा है कि इन बंधुओं ने करोड़ों रुपये की जमीन खरीद रखी है और नाम अफसर का सामने आ रहा है। खैर, साजिश का देरसबेर पर्दाफाश होकर रहेगा।

साहब को दफ्तर में बैठने से परहेज

पंजीयन कार्यालय में बैठने वाले एक साहब ऐसे हैं जिन्हें दफ्तर में बैठने से खासा परहेज है। साहब वरिष्ठ जिला पंजीयक के पद पर जब से पदस्थ हुए हैं, तबसे उनकी लोकेशन आम जनता को क्या खास लोगों को भी मिलना मुश्किल हो गई है। जब उनसे मिलने लोग आइएसबीटी कार्यालय पहुंचते हैं तो वहां बताया जाता है कि साहब तो परी बाजार गए हुए हैं। परी बाजार में आने के बाद पता चलता है कि साहब आइएसबीटी कार्यालय में ही मिलेंगे। अब इन दोनों दफ्तर की बजाय साहब किस दफ्तर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, यह जांच का विषय बन गया है लेकिन साहब इस दौरान फोन उठाना तो दूर बाद में जवाब देना तक उचित नहीं समझते हैं। आलम यह है कि साहब की इस कार्यप्रणाली से कार्यालय में निराशा का माहौल बना हुआ है। वह इसलिए क्योंकि साहब छठे चौमासे ही दर्शन देते हैं।

दो की लड़ाई में मलाई तीसरा खा रहा

नगर निगम में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है साहब। यहां दबाव बनाकर अपना काम निकालने वाले अफसरों और कर्मचारियों की भरमार है। यही कारण है कि निगम में आए दिन विवाद, झगड़े और मारपीट होने जैसी वारदात सामने आती रहती हैं। कर्मचारी-कर्मचारी से लड़ रहा है। बाहरी सहारे कोई कनिष्ठ अपने वरिष्ठ पर धौंस जमाने की जुगत में है तो कोई मंत्री के नाम पर का उपयोग कर अफसरों से ही उगाही में जुटा हुआ है। दो लोगों के आपसी विवाद पर बाहर बैठा तीसरा व्यक्ति जमकर मजे ले रहा है। यानी नगर निगम इन दिनों ऐसा अखाड़ा बन गया है जहां घर की लड़ाई में बाहरी मलाई खा रहा है। अफसरों में मची गुत्थमगुत्थी का तमाशा इंटरनेट मीडिया पर सरेआम हो रहा है और टीका- टिप्पणी के हमले भी खुलेआम हो गए हैं। कुछ भी हो इसमें बदनामी तो कुनबे की ही हो रही है, जिससे बचना ही बेहतर है।

Posted By: Ravindra Soni