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Madhya Pradesh News: नई तकनीक के जरिए अब चंद सेकंड में जान सकेंगे मिट्टी की सेहत

Updated: | Sun, 24 Jan 2021 09:51 AM (IST)

ईश्वर सिंह परमार, भोपाल। अब किसानों को मिट्टी की सेहत जानने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (आइआइएसएस) की भोपाल इकाई ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जो चंद सेकंड में ही बता देगी कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी है। इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी नामक इस तकनीक में 12 तरह के तत्‍वों की एक साथ जांच चंद सेकंड में ही हो जाएंगी, जबकि पारंपरिक तरीके से एक जांच में ही ढाई से तीन घंटे लगते हैं। वैज्ञानिक पिछले पांच साल से संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व कृषि वानिकी केंद्र नैरोबी (केन्‍या) के साथ मिलकर तकनीक पर काम कर रहे थे। इस दौरान प्रयोग के तौर पर दो हजार से अधिक नमूनों की जांच की गई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने भी इस तकनीक की सराहना की है।

रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग और जैविक खाद न डालने से मध्य प्रदेश में भी कई जगह खेतों की मिट्टी बीमार हो गई है। इसमें जिंक, कार्बन, आयरन, मैगनीज, नाइट्रोजन, फास्फोरस जैसे तत्वों की कमी है। यही तत्व मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और अच्‍छी पैदावार पाने में मदद करते हैं। ऐसे में मिट्टी सेहत सुधारने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड समेत कई पहल की जा रही हैं, किंतु प्रयोगशाला में पुरानी व पारंपरिक पद्धति से मिट्टी की जांच में समय लगता है और प्रदेश के लाखों किसान जांच कराना उचित नहीं समझते। ऐसे में आइआइएसएस ने इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी को प्रयोगशाला जांच के उत्तम विकल्प हेतु एक उन्‍नत तकनीक के रूप में मान्यता दी है।

विश्व कृषि वानिकी केंद्र की मदद से ईजाद हुई तकनीक

आइआइएसएस में मृदा भौतिकी विभाग अध्यक्ष डॉ. आरएस चौधरी ने बताया कि विश्व कृषि वानिकी केंद्र, नैरोबी (केन्‍या) के साथ इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर काम किया जा रहा था। मध्य प्रदेश समेत देश के प्रमुख क्षेत्रों से विभिन्न तरह की मिट्टी के दो हजार से अधिक नमूने एकत्र किए गए, जिनके भौतिक और रासायनिक गुणों की जांच की गई। विशेष मशीन केन्‍या से मंगाई गई, जबकि मिट्टी की जांच के लिए अन्य संसाधन यही से जुटाए गए। पहले चरण में मिट्टी की उर्वर क्षमता, उसमें मौजूद तत्व की स्थिति आदि की जांच की गई। इसके अच्छे परिणाम सामने आए।

ऐसे काम करती है तकनीक

केन्‍या से बुलाई गई मशीन में मिट्टी के कुछ कण रखे जाते हैं। इसके बाद विशेष रेडिएशन के जरिए मिट्टी को स्कैन किया जाता है। कम्प्यूटर स्क्रीन पर इसका ग्राफ बन जाता है, जो मिट्टी में मौजूद तत्वों की कमी या अधिकता की जानकारी बताता है। डॉ. चौधरी ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में 20 से 30 सेकंड का वक्त लगता है और एक साथ 12 तरह के तत्वों की जांच हो जाती है। पारंपारिक प्रयोगशाला में प्रत्येक तत्व की जांच में न सिर्फ ढाई से तीन घंटे का समय लगता है, बल्कि वह महंगी भी होती है।

इन तत्वों की जांच

कार्बन, पीएच, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, मैग्नीज, रेत की मात्रा, लवणता, मिट्टी की जल धारण क्षमता, अम्लीयता आदि।

इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक से मिट्टी की जांच कम समय में हो सकेगी। इससे किसान को तुरंत बता सकेंगे कि वे मिट्टी में कौन से तत्वों की कमी को दूर करें। यह अच्छी तकनीक है। -डॉ. अशोक के पात्रा, निदेशक आइआइएसएस

Posted By: Ravindra Soni
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