ओमिक्रोन ने रोकी राह, मध्य प्रदेश में चीता आने में होगी देरी

Updated: | Thu, 02 Dec 2021 08:09 AM (IST)

भोपाल(राज्य ब्यूरो)। चीता परियोजना की राह में फिर अड़चन आ गई है। कोरोना के नए ओमिक्रोन वैरिएंट के कारण ऐनवक्त पर वन अधिकारियों का दक्षिण अफ्रीका का दौरा निरस्त करना पड़ा है। ऐसे में मध्य प्रदेश की धरती पर चीता लाने की कोशिशें फिर पिछड़ गई हैं। अब कोरोना संक्रमण के नियंत्रण होने तक न तो अधिकारी दक्षिण अफ्रीका जा सकेंगे और न ही तकनीकी दल, जिससे अगले साल फरवरी-मार्च में चीता आने की संभावना खत्म हो गई है। अब साल के अंत तक चीता लाए जाने की संभावना है। पिछले दो साल का ट्रेंड देखें, तो कोरोना जनवरी से जून तक प्रभावी रहता है। हाल ही में नया वैरियंट सामने आया है। इसके सबसे ज्यादा मामले अफ्रीका में मिले हैं। इस कारण न तो मध्य प्रदेश के वन अधिकारी अफ्रीका जा सकते हैं और न ही वहां से यहां कोई दल आ सकता है।

ऐसे में चीता परियोजना पिछड़ने के पूरे आसार हैं, क्योंकि दोनों देश के अधिकारी जब तक बैठकर तय नहीं करेंगे कि चीता को अफ्रीका से यहां कैसे लाना है। कितने लाना है और उनका उपचार कैसे किया जाता है। तब तक चीता लाने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत सरकार ने नवंबर 2020 में चीता लाना तय किया था, पर ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में अगस्त माह में अतिवृष्टि और बाढ़ से कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीता के लिए बाड़ा तैयार करने का काम प्रभावित हुआ, तो उसके बाद अफ्रीका में भारतवासियों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। जिस कारण मध्य प्रदेश के अधिकारी अंतिम दौर की चर्चा के लिए दक्षिण अफ्रीका नहीं जा पाए। जब हालात ठीक हुए, तो पहले दल को भेजने की नोटशीट चली।

इस दल के साथ केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भी जाने को तैयार हो गए। जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने रोक लगा दी। इसके लिए सूची संशोधित हुई। 28 नवंबर को अधिकारियों का जाना तय हुआ। अधिकारी दिल्ली हवाई अड्डे तक पहुंच भी गए थे कि तब तक अफ्रीका में कोरोना के नए वेरियंट की पुष्टि हो गई और दौरा निरस्त करना पड़ा।

अफ्रीका की स्थिति सामान्य होने तक किसी को भेजा नहीं जाएगा। स्थिति कब तक ठीक होगी, अभी नहीं कह सकते हैं। तब तक हम अन्य जरूरी बंदोबस्त पूरे करेंगे। - आलोक कुमार, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मध्य प्रदेश

Posted By: Prashant Pandey