मध्‍य प्रदेश की राजनीति : दिग्विजय - सिंधिया ने एक दूसरे के खिलाफ खोला मोर्चा, चला रहे शब्दबाण

Updated: | Mon, 06 Dec 2021 08:07 AM (IST)

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद से जो लड़ाई अब तक परदे के पीछे चल रही थी, वो अब खुलकर सामने आ गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक-दूसरे के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। पहली बार दिग्विजय सिंह के गढ़ राघौगढ़ पहुंचकर सिंधिया ने उनके कट्टर समर्थक पूर्व विधायक स्वर्गीय मूल सिंह के बेटे हीरेंद्र सिंह को भाजपा की सदस्यता दिलाकर इरादे साफ कर दिए। वहीं, दिग्विजय सिंह ने मधुसूदनगढ़ पहुंचकर पलटवार किया। सिंधिया को कांग्रेस की सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि कांग्रेस से गद्दारी करके विधानसभा सदस्यों को साथ ले गए।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जिस तरह से शब्दबाण चल रहे हैं, उससे साफ है कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अभी तक न तो दिग्विजय सिंह सिंधिया के खिलाफ खुलकर कुछ बोलते थे और न ही सिंधिया लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से स्थितियां बदल गई हैं।

सिंधिया के चुनाव हारने का बड़ा कारण भितरघात को माना गया। सब जानते हैं कि दिग्विजय सिंह का क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव है। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी सिंधिया की पूछपरख नहीं हुई। उनके समर्थकों को मंत्री तो बनाया गया पर कोई अधिकार नहीं दिए गए। फरवरी 2020 में दिग्विजय सिंह ने खींचतान को समाप्त करने के लिए सिंधिया से गुना में मुलाकात का प्रयास भी किया था लेकिन नहीं हो पाई। इसके बाद सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली। उनके समर्थक विधायकों ने भी कांग्रेस से किनारा कर लिया। कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और अंतत: कमल नाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

उधर, भाजपा की सरकार बनने के बाद सिंधिया समर्थक मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने राघौगढ़ के दौरे करके आमने-सामने की लड़ाई के संकेत दिए थे। सिंधिया ने जब मंच से दिग्विजय सिंह के समर्थक हीरेंद्र सिंह को भाजपा की सदस्यता दिलाई तो इस पर मोहर भी लग गई। इसे सिंधिया का सीधा हमला माना जा रहा है क्योंकि हीरेंद्र पूर्व विधायक स्वर्गीय मूल सिंह के पुत्र हैं जिन्हें दिग्विजय सिंह के परिवार का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने दिग्विजय सिंह का नाम जरूर नहीं लिया पर साफ संकेत दे दिए हैं कि अब कोई समझौता नहीं होगा।

उधर, सिसोदिया ने साफ कर दिया कि आगामी चुनाव में सिंधिया का आशीर्वाद मिलने से हीरेंद्र सिंह का घोड़ा अब सीधे राघौगढ़ किले की ओर जाने वाला है। मतलब साफ है कि राघौगढ़ विधानसभा से हीरेंद्र सिंह भाजपा का चेहरा होंगे। यहां दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह विधायक हैं। यानी मुकाबला आमने-सामने का होगा। यही वजह है कि मधुसूदनढ़, चाचौड़ा और लटेरी में दिग्विजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि गद्दारी एक व्यक्ति करता है तो उसकी पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी करती है। इतिहास इस बात का साक्षी है। संकेत साफ हैं कि बात वार-प्रतिवार से आगे निकल चुकी है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि आज दिग्विजय सिंह को ज्योतिरादित्य सिंधिया में तमाम बुराइयां और दोष नजर आते हैं। गद्दारी तो आपने और कमल नाथ ने की है। प्रदेश के किसान, युवा, बहन-बेटियों के साथ छल-कपट किया। इसका नतीजा उपचुनाव में मिला है। वर्ष 1775 से 1782 तक राघौगढ़ के राजा बलवंत सिंह ने मराठाओं के विरुद्ध विदेशियों का साथ दिया, जिन्हें महादजी सिंधिया ने परास्त किया था। उन्होंने बलवंत सिंह को ग्वालियर के किले में कैद किया था क्योंकि उन्होंने देश के साथ धोखा किया था। राजा रघुवीर सिंह ब्रिटिश लोगों की मदद करते थे। राजा जय सिंह सबसे ज्यादा अंग्रेजों के नजदीक थे। इतिहासकारों की नजर से जब-जब अवसर आया तो राघौगढ़ के राजाओं और गढ़ के लोगों ने देश के साथ गद्दारी की। वहीं, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री मीडिया केके मिश्रा ने कहा कि गद्दारी किसने की है, यह किसी से छुपा नहीं है। कांग्रेस से किसने गद्दारी की और चुनी हुई सरकार को कैसे गिराया, यह प्रदेशवासी जानते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay