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मध्‍य प्रदेश में अधिकारियों और नेताओं के विदेश दौरे पर रोक लगाने की तैयारी, यह है वजह

Updated: | Sun, 07 Mar 2021 04:19 PM (IST)

भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। कोरोना संकट में आमजन के साथ राज्य सरकार का खजाना भी खाली हुआ है। इस संकट को अनावश्यक खर्च में कटौती कर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इस मॉडल पर मध्य प्रदेश सरकार ने काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों और नेताओं के विदेश दौरे पर रोक लगाने की तैयारी है। इसके तहत देश के भीतर सफर करने के दौरान हवाई यात्राओं में प्रथम श्रेणी की सुविधा भी नहीं रहेगी।

यह राशि सरकारी खजाने के दृष्टिकोण से भले ही बहुत छोटी है, लेकिन इससे बचत का बड़ा संदेश दिया जाएगा। इस बार के बजट में भी इसकी झलक दिखी है। सरकार ने बहुत-सी ऐसी योजनाओं की राशि में कटौती की है, जो आमजन के हित से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं हैं।

मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति इन दिनों बेहतर नहीं है। लगभग हर महीने सरकार एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज ले रही है। तमाम योजनाओं में सरकार ने कटौती कर दी है। अब सरकार मितव्ययिता के उपाय बरत रही है। वर्ष 2020 में तो कोरोना के कारण अधिकारियों की विदेश यात्राएं नहीं हुईं, लेकिन इससे पहले वर्ष 2019 में कई मंत्री विदेश यात्रा पर गए थे। छह अफसर स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया का दौरा कर आए।

लगाम कसी पर छोटे अफसरों पर

मध्य प्रदेश में खजाने की खराब माली हालत को देखते हुए राज्य सरकार ने अब तक अफसरों की हवाई यात्रा पर लगाम तो कसी, लेकिन मात्र छोटे अफसरों पर। अब मंत्री की अनुमति के बाद भी अफसर विदेश यात्राएं नहीं कर पाएंगे। अपर सचिव, उप सचिव और अवर सचिव स्तर के अफसरों की विदेश यात्राओं का खर्च यदि राज्य सरकार की संस्थाएं उठा रही हैं तब भी उन्हें वित्त विभाग से अनुमति लेना जरूरी होगा। अनुमति वित्त मंत्री ही देंगे।

स्विट्जरलैंड गए थे अफसर

वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्य सचिव एसआर मोहंती, प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल और प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान जनवरी में स्विट्जरलैंड में हुए विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेने गए थे। सरकार के इस प्रतिनिधिमंडल ने दावोस में एक्सक्लूसिव बिजनेस लॉन्ज में हिस्सा लिया। यात्रा के लिए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के होटल में ठहरने पर 45 लाख रुपये खर्च हुए।

दावोस में एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने पर 9.5 लाख रुपये खर्च हुए। ज्यूरिख एयरपोर्ट पर वीआइपी लॉन्ज का इस्तेमाल करने पर दो लाख रुपये खर्च हुए, 50 हजार रुपये ट्रेवल इंश्योरेंस पर खर्च हुए, 40 लाख रुपये डीआइपीपी लॉन्ज में हिस्सा लेने और प्रचार सामग्री पर खर्च हुए। लगभग डेढ़ करोड़ का खर्च यात्रा पर आया। इसी वर्ष लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन, सामाजिक न्याय के प्रमुख सचिव जेएन कंसौटिया और प्रमुख सचिव पंकज अग्रवाल (अब प्रतिनियुक्ति पर) अगस्त महीने में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर गए थे।

इसी तरह, कमल नाथ सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री रहे डॉ. प्रभुराम चौधरी और प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी के नेतृत्व में एक दल दक्षिण कोरिया गया था। अगस्त 2019 में ही एक प्रतिनिधिमंडल यूएसए के दौरे पर गया। जिसमें तत्कालीन वित्त मंत्री तरुण भनौत, पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल हनी, डॉ. राजेश राजौरा, फैज अहमद किदवई, अशोक बर्णवाल शामिल थे ।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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