मध्‍य प्रदेश में आरटीआइ : सेवा आनलाइन और विभागों को जोड़ा तक नहीं

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 04:35 PM (IST)

भोपाल(राज्य ब्यूरो)। राज्य में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों का किस तरह से त्वरित पालन होता है, इसका उदाहरण है आरटीआइ (सूचना का अधिकार) के आवेदन लेने की प्रक्रिया। एनआइसी (राष्ट्रीय सूचना केंद्र) ने यह सेवा आनलाइन तो कर दी है, पर सामान्य प्रशासन (जीएडी), लोक प्रबंधन, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग कोे छोड़कर अन्य किसी भी विभाग को सीधे आवेदन नहीं भेज सकते हैं, क्योंकि अभी तक अन्य विभागों को इस सेवा से जोड़ा ही नहीं गया है।

ऐसे में प्रदेशभर से भेजे जा रहे किसी भी विभाग से संबंधित आनलाइन आवेदन सिर्फ जीएडी तक पहुंच रहे हैं। विभाग को हर हफ्ते औसत 50 आवेदन मिल रहे हैं। उनमें से करीब पांच उसके होते हैं।

जनकल्याण और सुराज अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ई-गवर्नेंस की घोषणा की थी। इसमें जनता से सीधे जुड़ी सेवाओं को आनलाइन करने के निर्देश दिए थे। ताकि जनता को अपने काम के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

काम एनआइसी का था, तो ताबड़तोड़ कार्यवाही हुई और ड्राइविंग लाइसेंस, 12 जिलों के शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में भूमि उपयोग प्रमाण पत्र, विस्फोटक सामग्री का लाइसेंस, सहित कई सेवाएं आनलाइन कर दी गईं। इनमें आरटीआइ भी शामिल है।

एमपी ई-सर्विस पोर्टल पर आरटीआइ आवेदन के लिए लगभग सभी विभाग दर्शाए गए हैं, पर आवेदन सिर्फ चार में ही किया जा सकता है। ऐसे में लोग अन्य विभागों की जानकारी मांगने से संबंधित आवेदन भी जीएडी में ही लगा रहे हैं। ये आवेदन जीएडी दूसरे विभागों को भेजता है। जिससे सेवा मिलने में देरी हो रही है।

आवेदन आनलाइन, पर कार्रवाई आफलाइन

सरकार ने आवेदन तो आनलाइन कर दिया, पर शेष कार्रवाई अब भी आफलाइन ही की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि आनलाइन आवेदन आने के बाद उसके प्रिंट निकाले जाते हैं। फिर फाइल बनती है, जो विभिन्न् शाखाओं से भेजी जाती है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay