अपने हिस्से का नर्मदा का पानी रोकने के लिए वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेगी मप्र की शिवराज सरकार

Updated: | Sat, 04 Dec 2021 08:57 PM (IST)

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्‍ट्र और राजस्थान के बीच नर्मदा के पानी के बंटवारे के निर्णय पर वर्ष 2024 में पुनर्विचार से पहले अपने हिस्से के 3.7 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) पानी का उपयोग करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ताबड़तोड़ सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण में जुटी है। सरकार ने पिछले महीनों में दस नई परियोजनाओं को मंजूरी भी दी है ताकि प्रदेश के हिस्से का पानी प्रदेश में ही रोका जा सके।

अब इन परियोजनाओं का काम शुरू करने के लिए सरकार नाबार्ड से करीब चार हजार करोड़, बैंक आफ महाराष्ट््र से डेढ़ हजार करोड़, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं से करीब सात हजार करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है।

इन संस्थाओं से सरकार पहले दौर की चर्चा कर चुकी है और वे कर्ज देने को तैयार हैं। सरकार की कोशिश है कि स्वीकृत परियोजनाओं का वर्ष 2023 के अंत तक न सिर्फ काम शुरू हो जाए, बल्कि बांध की पांच फीट तक दीवार भी खड़ी हो जाए। नर्मदा के पानी के बंटवारे के निर्णय पर 41 साल बाद वर्ष 2024 में पुनर्विचार होना है।

तब तक मध्य प्रदेश ने अपने हिस्से का 3.7 एमएएफ पानी का उपयोग नहीं किया, तो यह जल राशि गुजरात के खाते में चली जाएगी। इसका अंदाजा लगने के बाद सरकार किसी भी सूरत में अपने हिस्से के पानी के उपयोग में जुट गई है। सरकार प्रदेश का सिंचित रकबा 40 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए 10 नई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से जुटाई जा रही राशि से इन्हीं परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। ताकि जब वाटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल (नर्मदा जल विवाद अभिकरण) पानी के बंटवारे के निर्णय पर पुनर्विचार करे, तब मध्य प्रदेश मजबूती से अपना पक्ष रख सके। उल्लेखनीय है कि इन परियोजनाओं पर 20 हजार रुपये खर्च होंगे।

14.55 एमएएफ पानी का उपयोग कर रहा प्रदेश नर्मदा जल विवाद अभिकरण ने वर्ष 1979 में चारों राज्यों के बीच नर्मदा के पानी का बंटवारा किया था। तब मध्य प्रदेश के हिस्से में 18.25 एमएएफ, गुजरात के नौ एमएएफ, महाराष्ट्र के 0.25 एमएएफ और राजस्थान के हिस्से में 0.50 एमएएफ पानी आया था। मध्य प्रदेश इसमें से वर्तमान में 14.55 एमएएफ पानी का उपयोग कर पा रहा है। यानी 3.7 एमएएफ पानी का उपयोग नहीं हो रहा है।

ये होंगे फायदे

इन परियोजनाओं से प्रदेश का सिंचाई रकबा तो बढ़ेगा ही, कई शहरों-गांवों में पेयजल समस्या का समाधान होगा और बिजली उत्पादन के नए विकल्प भी मिलेंगे।

प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं

चिंकी-बौरास बराज संयुक्त बहुउद्देशीय माइक्रो सिंचाई परियोजना के तहत चिंकी एवं बौरास बराज, पावर हाउस, पंप हाउस का निर्माण होना है। इससे नरसिंहपुर-रायसेन एवं होशंगाबाद जिले के 396 ग्राम लाभान्वित होंगे और एक लाख 31 हजार 925 हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी।

सांवेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के तहत खरगोन-इंदौर में प्रेशराइज्ड पाइप सिंचाई प्रणाली का निर्माण होगा। इससे 272 ग्राम लाभान्वित होंगे और 80 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माइक्रो सिंचाई परियोजना के तहत 30 जून 2023 तक खरगोन जिले में माइक्रो सिंचाई पद्घति से सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य रखा है। इससे 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

मुख्यमंत्री ने सलीमाबाद टनल का काम अगले एक साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay