सूदखोरों पर कठोर कार्रवाई हो, तभी लग सकती है लगाम, पुलिस को बढ़ानी होगी निगरानी

Updated: | Mon, 29 Nov 2021 10:16 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में सूदखोरी से परेशान होकर एक परिवार के पांच लोगों ने जहर पीकर खुदकुशी की कोशिश की, इसमें से चार लोगों की मौत हो चुकी है। एक महिला अब भी गंभीर है। अब सूदखोरों पर लगाम लगाने की चर्चा चल रही है। इस पर पुलिस सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि सूदखोरों पर लगातार कार्रवाई हो और सख्त धाराओं में एफआइआर हो, तभी यह रुक सकती है। इसके अलावा पुलिस को अपने थाना क्षेत्र में निगरानी बढ़ना होगी, जहां पर सूदखोरी हो रही है।

मालूम हो कि न्यू अशोक विहार कॉलोनी ने संजीव जोशी और उनकी दो बेटी, मां और पत्नी अर्चना ने जहरीला पदार्थ पी लिया था। उनको सवा तीन लाख का कर्जा देकर सूदखोर महिला उनसे लगातार रकम ऐंठ रही थी और मूल कम ही नहीं हो रहा था। बाद में पुलिस ने चार आरोपित बबली दुबे, उसकी बेटी रानी दुबे, सगी बहनें उर्मिला खंबारा और प्रमिला बेलदार पर प्रकरण दर्ज कर उन्‍हें हिरासत में लिया।

ब्लैंक चेक पर कराते हैं साइन

सूदखोरों का शिकार हुए एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने सूदखोरों से परेशान होकर 2013 में खुदकुशी करने मन बना लिया था, लेकिन एक व्यक्ति ने मदद की और पुलिस के पास भेजा । जहां पुलिस को बताया कि बीमार हो जाने के कारण व्यापार में घाटा हो गया था, इसलिए उसने दो लाख रुपये उधार लिए थे। 3 प्रतिशत ब्याज की दर से उधार रुपये दिए थे। इसके बाद बीच-बीच में ब्याज की दर बढ़ाते चले गए। दो के स्थान पर तीन लाख दे चुका था, लेकिन वह चार लाख मांग रहे थे। ब्लैंक चेक पर साइन कराकर अपने पास रख लिया है। उस बाउंस कराकर फंसाने की धमकी देते है। मानसिक तनाव में आने के बाद पुलिस पर पहुंचा तो मेरी जान बच गई।

पूर्व सीएसपी जहांगीराबाद रहे सलीम खान ने सात साल पहले एक रेलवे कर्मचारी की शिकायत पर सूदखोरों के खिलाफ अभियान चलाया था। उसके बाद से ऐशबाग, जहांगीराबाद, बजरिया में सूदखोर इलाका छोड़कर भाग गए थे। उस समय करीब 17 के करीब सूदखोरों पर कार्रवाई की गई थी। रेलवे कर्मचारी ने बेटी की शादी के कर्जा लिया था। बाद में आरोपित बदमाश ने उन्होंने उससे दो लाख के सात लोग मांग रहे थे।

इलाके में घूमना होगा, निगरानी करनी होगी

पुलिस के सेवानिवृत्त नगर निरीक्षक यूएस तिवारी का कहना है कि पुलिस को गश्त बढ़ानी होगी। अपनी निगरानी तेज करनी होगी। यह सूदखोर का संबंध सटोरियों और जुआरियों को अंजूमन जैसे मामलों में भी होगा। पुलिस की सख्ती के बाद भी उस पर अंकुश लग सकता है। अगर कोई शिकायत करता है और वापस भी लेता है। तब भी पुलिस उसका फॉलोअप करना चाहिए।

सूदखोरी के खिलाफ हमारे समय पुलिस ने कठोर कार्रवाई की थी। सूदखोरी एक तरह से बंद हो गई थी। एक तारीख से दस तारीख तक पुलिस लगातार मूवमेंट कर सूदखोरों पर निगरानी करती थी।

-सलीम खान, सेवानिवृत्त सीएसपी, जहांगीराबाद

Posted By: Ravindra Soni