मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं, मौत के आंकड़े दे रहे गवाही

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 07:50 PM (IST)

भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। आठ साल के प्रयास के बाद वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश को दोबारा टाइगर स्टेट का दर्जा मिला, लेकिन बाघों की सुरक्षा को जो गंभीरता होनी चाहिए, वह नहीं दिखाई दे रही है। साल-दर-साल बाघों की मौत के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इस साल अब तक 39 बाघों की मौत हो चुकी है। यह पिछले पांच साल में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इनमें नौ शिकार के मामले हैं।

हालांकि, वन विभाग ने शिकार के सभी मामलों में कार्रवाई की है, पर बात बाघों की सुरक्षा के ठोस प्रबंध की है। केंद्र ने वर्ष 2010 में बाघों की सुरक्षा के लिए चुनींदा टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) गठित करने के निर्देश दिए थे। इनमें प्रदेश का बांधवगढ़, कान्हा और पेंच पार्क भी शामिल था। बाघों की संख्या के मामले में जिस कर्नाटक से मध्य प्रदेश का मुकाबला है, वह उसी साल फोर्स गठित कर चुका है और यहां प्रस्ताव मंत्रालय में घूम रहा है।

मध्य प्रदेश्ा में वर्ष 2015 तक तो किसी ने फोर्स गठन की सुध नहीं ली। जब आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई, तब फोर्स गठन की सुगबुगाहट शुरू हुई। शुरुआत में पुलिस ने आपत्ति लगाई। प्रस्ताव में संशोधन कर 16 अक्टूबर 2019 को गृह विभाग को भेजा गया, जो करीब सवा साल गृह विभाग में ही पड़ा रहा। फिर वन सचिवालय को लौटा दिया गया। अब नोटशीट अलमारी में कैद है और प्रदेश में शिकारी गतिविधियां जारी हैं। ज्ञात हो कि फोर्स पर 60 प्रतिशत राशि केंद्र और 40 प्रतिशित राशि राज्य सरकार को खर्च करनी है। वर्ष 2010 में इसके लिए 100 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही थी।

आपत्ति और इन्कार में फंसी फोर्स में नियुक्ति

केंद्र सरकार ने फोर्स में सशस्त्र सैनिक रखने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने शुरुआत में पुलिस मुख्यालय से आरक्षकों की मांग की थी, पर अमला कम होने के कारण मुख्यालय ने इन्कार कर दिया। फिर वनरक्षक और वनपाल को फोर्स में रखने पर विचार हुआ तो पुलिस को उन्हें शस्त्र देने पर आपत्ति थी। विभाग ने फिर भी फोर्स के लिए नए कर्मचारियों की भर्ती करने का प्रस्ताव भेजा तो सरकार की वित्तीय स्थिति खराब होना बताकर इन्कार कर दिया।

केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार 40 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों को फोर्स में नहीं रखा जा सकता है। इसलिए वर्तमान कर्मचारियों में से फोर्स के लिए चयन करना संभव नहीं है। उल्लेखनीय है कि तीनों पार्कों में एक-एक कंपनी तैनात होगी। प्रत्येक कंपनी में 112 सुरक्षाकर्मी रखे जाने हैं। इसमें 18 से 25 साल के 24 वनरक्षक और 34 वनपाल रहेंगे।

इनका कहना है

स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का प्रस्ताव भेजा गया था। अब तक यह नहीं लौटा है।

- आरके गुप्ता, वन बल प्रमुख, मध्य प्रदेश

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay