मानव संग्रहालय में इस सप्‍ताह प्रमुख आकर्षण है अथेर्यु, जानिए क्‍यों है खास, किस अंचल से है विशेष नाता

Updated: | Tue, 07 Dec 2021 06:30 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। राजधानी में स्‍थिति इंदिरा गाधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की नवीन श्रृंखला 'सप्ताह का प्रादर्श' के अंतर्गत विगत सोमवार को दिसंबर माह के इस हफ्ते के प्रादर्श के रूप में एक कपड़े के एक विशिष्‍ट कलात्‍मक आवरण को दर्शकों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया गया है, जिसका नाम है 'अथेर्यु या अथरियु'। यह ऊंट के आवरण के रूप में इस्‍तेमाल होता है। इस प्रादर्श की लंबाई 184.5 सेमी और चौड़ाई 138 सेमी है। इसे संग्रहालय द्वारा सन 1995 में कच्छ, गुजरात के रबारी समुदाय से संकलित किया गया था।

इस संबंध में मानव संग्रहालय के निदेशक डा. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि अथरियु ऊंटों को सजाने के लिए प्रयुक्त एक आवरण है, जिसे कच्छ, गुजरात की रबारी महिलाओं द्वारा बनाया एवं पिपली डिजाइन और कपड़े की लटकनों से सुसज्जित किया जाता है। रबारी समुदाय का एक उपसमूह है ढेबरिया रबारी, जो परंपरागत रूप से ऊंट पालते हैं। वे अपने पशुओं के लिए चरागाहों की तलाश में रेगिस्तान में बहुत दूर तक प्रवास करते हैं। उनके जीवन में जरूरी सभी वस्तुएं ऊंटों पर लादी तथा ढोई जाती हैं। इसलिए ऊंटों को श्रेष्ठ जानवर माना जाता है। वे मेलों, त्योहारों और विवाह के दौरान बारात के लिए ऊंटों को सजाते हैं। अथरियु के अलावा वे ऊंटों को कई अन्य सज्जा सामग्रियों जैसे सिर के कपड़े रस्सी और मुंह के लिए लटकन के गहने, गर्दन की पट्टी, माला, घुटने के आभूषणों आदि से सजाते हैं। उल्लेखनीय है मानव संग्रहालय की ओर से प्रादर्श के अंतर्गत अपने संग्रह में से कुछ ऐसी वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाता है, जो किसी क्षेत्र या समुदाय की संस्कृति को दर्शाने के साथ ही अपने आप में विशेष होती हैं। दर्शक इसका अवलोकन मानव संग्रहालय के इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से घर बैठे भी कर सकते हैं।

Posted By: Ravindra Soni