भोपाल के मानव संग्रहालय में इस सप्ताह का प्रादर्श है घोड़िया, जानें इसकी खासियत

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 12:23 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की श्रृंखला 'सप्ताह का प्रादर्श के अंतर्गत सोमवार को नवंबर माह के पांचवे सप्ताह के प्रादर्श के रूप में घोड़िया (लकड़ी का एक पालना) को इस सप्ताह दर्शकों के मध्य प्रदर्शित किया गया है।

संग्रहालय द्वारा इसे वडोदरा, गुजरात के सुतार समुदाय से 1986 में संकलित किया गया था। प्रादर्श की लंबाई 129 सेमी, चौड़ई 70 सेमी और ऊंचाई 102 सेमी है।

इस संबंध में संग्रहालय के निदेशक डा. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि घोड़िया लकड़ी का एक पालना है। इस पर लाख की जटिल रूपांकन युक्त चित्रकारी की गई है। इसमें कोणीय आकार लिए आधार स्तंभ के दो जोड़े एक दूसरे के विपरीत लगे हैं और पालने को मजबूत और स्थिर रखने के लिए शीर्ष पर एक क्षैतिज बल्ली जोड़ी गई है। शिशु के खेलने और सोने के लिए पालने को आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें उपयुक्त आकार की एक उथली टोकरी लगी हुई है। पालना बच्चों की रीढ़ को पूरा सहारा देता है और इसकी हिलने-डुलने की गति बच्च्ो को मां की गोद में सुरक्षित रूप से लेटे होने का भान कराती है। केंद्र में टोकरीनुमा पात्र बीच की लकड़ी पर धीरे-धीरे झूलता है। पालने की गति बच्च्ाों को सोने में मदद करती है, ताकि मां घर का सारा काम कर सके। पालने की बनावट गुजरात के समृद्ध शिल्प कौशल को दर्शाती है। दर्शक इसका अवलोकन मानव संग्रहालय की अधिकृत साइट, फेसबुक के अतिरिक्त इंस्टाग्राम एवं ट्वीटर के माध्यम से घर बैठे कर सकते हैं। उल्लेखनीय है संग्रहालय द्वारा किसी स्थान विशेष की संस्कृति और परंपरा को दर्शाने वाले ऐसे विशेष प्रकार के उपकरणों का प्रदर्शन हर सप्ताह किया जाता है।

Posted By: Lalit Katariya