केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी, केन-बेतवा परियोजना से आठ लाख हेक्टेयर में सिंचाई, तेजी से होगा औद्योगिक विकास

Updated: | Thu, 09 Dec 2021 07:50 AM (IST)

भोपाल (राज्य ब्यूरो)। केन-बेतवा लिंक परियोजना की राह में आने वाली सभी अड़चनें अब दूर हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मंजूरी दी गई। आठ साल में यह पूरी होगी। इससे मध्य प्रदेश में आठ लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की स्थिति तो सुधरेगी ही, पूरे क्षेत्र की दशा और दिशा बदल जाएगी। औद्योगिक विकास भी तेज गति के साथ होगा। पेयजल का संकट भी खत्म होगा।

परियोजना के तहत गैर वर्षाकाल (नवंबर से मई तक) में दौधन बांध से मध्य प्रदेश को 1834 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर यानी 1834 अरब लीटर) और उत्तर प्रदेश को 750 एमसीएम (750 अरब लीटर) पानी मिलेगा। सामान्य वर्षाकाल में मध्य प्रदेश को 2350 और उत्तर प्रदेश को 1700 एमसीएम (अरब लीटर) वार्षिक जल मिलेगा। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि परियोजना के लिए सबसे पहले मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच वर्ष 2005 में समझौता हुआ था। जल बंटवारे सहित अन्य मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया था।

लगातार बैठकें की गईं। 22 मार्च, 2021 को पीएम नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता अनुबंध हुआ। दौधन के पास बांध बनाकर केन नदी का पानी रोका जाएगा। यहां से 221 किमी लंबी नहर के माध्यम से केन बेसिन के 1074 अरब लीटर पानी बेतवा बेसिन में पहुंचाया जाएगा। तीन बांध बेतवा नदी पर बनाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 470 किमी लंबी केन नदी बुंदेलखंड की प्रमुख नदी है। यह मध्य प्रदेश में 292, दोनों राज्य (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) की सीमाओं पर 51 और उत्तर प्रदेश में 84 किमी बहती है।

बुंदेलखंड के लिए सपने के साकार होने के समान

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इसके माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र में न सिर्फ पानी की कमी पूरी होगी बल्कि खेती के लिए भरपूर जल मिलेगा। परियोजना मध्य प्रदेश और विशेषकर बुंदेलखंड के लिए एक सपने के साकार होने के समान है।

यह होगा लाभ

मध्य प्रदेश में आठ लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कृषि उत्पादन बढ़ेगा, हरियाली बढ़ेगी।

41 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी। भूजल की स्थिति सुधरेगी।

103 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग केवल मध्य प्रदेश करेगा।

जल आपूर्ति होने से बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिकीकरण एवं निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

बुंदेलखंड क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पलायन रुकेगा।

उत्तर प्रदेश के दो लाख 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी।

इतनी सिंचाई का अनुमान

जिला क्षेत्र (हेक्टेयर में)

पन्ना 70,000 छतरपुर 03,11,151 दमोह 20,101 टीकमगढ़-निवाड़ी 50,112 सागर 90,000 दतिया 14,000 विदिशा 20,000 रायसेन 6,000

शिवपुरी,रायसेन और विदिशा जिले के 62 लाख लोगों को पेयजल भी उपलब्ध होगा। प्रदेश के दस गांवों के 1,913 परिवारों का होगा विस्थापन परियोजना का कुल डूब क्षेत्र 9000 हेक्टेयर है। इसमें मध्य प्रदेश के दस गांवों के 1,913 परिवारों का विस्थापन होगा। भूमि अधिग्रहण का मुआवजा प्रभावितों को मिलेगा और पुनर्वास के प्रबंध किए जाएंगे।

दोनों प्रदेश के लोगों का भाग्य बदल देगीः उमा भारती

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोगों का भाग्य बदल देगी। वर्ष 2017 के अंत में ही योजना शुरू होने की स्थिति में आ गई थी। सिर्फ दोनों राज्य सरकार में कुछ बिंदुओं पर सहमति शेष रह गई थी, वो भी अब पूरी हो गई है। इसके लिए प्रधानमंत्री के साथ दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री का अभिनंदन, जिन्होंने इसमें योगदान किया।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay