विश्‍वरंग महोत्‍सव : पहले बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता, फिर चला शेर-ओ-शायरी का दौर

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 09:20 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। रवींद्र नाथ टैगोर विश्विद्यालय (आरएनटीयू) में शुक्रवार को विश्वरंग महोत्सव के दूसरे दिन चिल्ड्रन फेयर कार्निवल का आयोजन किया गया। बच्चों के लिए कार्निवाल में पेंटिंग वर्कशॉप, मास्क मेकिंग वर्कशॉप, काइट एच फ्लाइंग वर्कशॉप, कलर मिक्सिंग वर्कशॉप, पॉटरी और पपेट वर्कशॉप आदि का आयोजन किया गया। इन वर्कशॉप में बच्चों को अलग-अलग एक्टिविटी सिखाई गई। इस दौरान बच्चों ने बढ़-चढ़कर एक्टिविटीज में भाग लिया और खूब प्रसन्‍न नजर आया।

इसके अलावा विश्‍वरंग महोत्‍सव के तहत इंटरनेशनल मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के नामचीन शायरों ने शिरकत की। यूएसए से आए फरहात शहज़ाद ने सुनाया प्यार घड़ी भर का भी बहुत है, झूठा सच्चा मत सोचा कर...। मुंबई से आए मशहूर शायर शकील आज़मी ने आंख मिलते ही नई चाल में आ जाता है, दिल परिंदा है तेरे जाल में आ जाता है... सुनाते हुए श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। मुशायरे की इस शाम को जीवंत बनाते हुए आलोक श्रीवास्तव, नुसरत मेंहदी, शाद जांलधरी, खुशबीर सिंह, इकबाल असर, मनोज सगोरिया जैसे प्रतिष्ठित शायरों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया और शाम को खुशगवार बना दिया। मुशायरे का मंच संचालन मशहूर शायर वद्र वास्ती ने किया। इस दौरान उन्होंने अपनी गजल इश्क से आपकी जो दूरी है, आपकी जिंदगी अधूरी है, लुत्‍फ जीने का चाहते हो अगर, प्यार करना बहुत जरूरी है... पेश करते हुए श्रोताओं को दाद देने के लिए मजबूर कर दिया। आलोक श्रीवास्तव ने गजल की नज्म जो दिख रहा है सामने वो दृश्य मात्र है, लिखी रखी है पटकथा मनुष्य पात्र है... को पेश करते हुए श्रोताओं का प्‍यार अर्जित किया। वहीं अज़हर इकबाल ने गाली को प्रणाम समझना पड़ता है, मधुशाला को धाम समझना पड़ता है...। आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में, रावण को राम समझना पड़ता है... सुनाते हुए आधुनिक दौर की विद्रूपताओं पर कटाक्ष किया।

Posted By: Ravindra Soni