विश्‍व दिव्‍यांग दिवस 2021 : भोपाल की दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ी पूनम अब दूसरों को दिखा रहीं खेल की राह

Updated: | Fri, 03 Dec 2021 09:01 AM (IST)

ललित नारायण कटारिया, भोपाल। राजधानी की प्रतिभाशाली दृष्टिबाधित महिला जूडो खिलाड़ी पूनम शर्मा ने अपने खेल से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है, अब ट्रेनिंग के क्षेत्र में उन्होंने कदम बढ़ा दिए हैं। पूनम के कोच प्रवीण भटेले ने दावा किया कि वह देश में मार्शल आर्ट की पहली ट्रेनर है। इसके लिए अब पूनम का नाम लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है।

पूनम शहर के लालघाटी स्थित श्री ब्लिस मिशन फार पैरा एंड ब्राइट संस्था में अपना नया सफर शुरू कर रही हैं। पूनम ने यहीं पर जूडो सीखा है। वह वर्तमान में विश्व की 14वें नंबर की खिलाड़ी हैं। इसके साथ ही 2018 से वह देश की नंबर वन खिलाड़ी हैं। पूनम ने कुल नौ अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। पूनम ने 2019 में कजाकिस्तान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इससे पहले कामनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप 2019 इंग्लैंड और कामनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप 2018 से भारत देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीते थे।

कोच प्रवीण भटेले का विशेष योगदान

पूनम शर्मा ने वर्ष 2017 में जूडो में प्रवेश किया था। इसमें कोच व सीएसपी बिट्टू शर्मा और कोच प्रवीण भटेले का विशेष योगदान है। उन्होंने लालघाटी में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए श्री ब्लिस मिशन फार पैरा एंड ब्राइट संस्था स्थापित की है। इसमें पूनम जैसे दो दर्जन से ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इसमें से कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। प्रवीण भटेले ने कहा कि हमारी संस्था ने अपने दिव्यांग प्रशिक्षकों के लिए उचित वेतन भी निर्धारित कर लिया है। पूनम आसानी से सामान्य बच्चों एवं महिलाओं की मार्शल आर्ट टीम बनाकर ट्रेनिंग दे रही है।

पूनम की निगाहें पैरा एशियन गेम्स पर

पूनम ने कहा कि जूडो ने मुझे नया जीवन दिया है। अब अपने खेल के साथ ही नए खिलाड़ियों को तैयार करना चाहती हूं। पूनम ने कहा कि वह जनवरी में होने वाले राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है, उसकी नजरें चीन में 2022 में होने वाले पैरा एशियन गेम्स पर हैं। पूनम ने कहा कि खेलने के साथ दूसरों को ट्रेनिंग देना चुनौतीपूर्ण कार्य है। मैं चाहती हूं कि युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उनके करियर बनाने में अपना योगदान दे सकूं। मेरी इस सफलता का श्रेय कोच बिट्टू शर्मा व प्रवीण भटेले को जाता है, उन्होंने ही मुझे खेलने के लिए प्रेरित किया और अब बतौर ट्रेनर के रूप में भी मदद कर रहे हैं।

Posted By: Ravindra Soni