Chhatarpur ANMs record in vaccination: आठ माह में बिना छुटटी लिए 61141 लोगों का टीकाकरण करके बनाया रिकार्ड

Updated: | Mon, 27 Sep 2021 11:26 AM (IST)

- जोश, जुनून और जज्बे की मिसाल बना एएनएम माया का सेवा के प्रति समर्पण

Chhatarpur ANM's record in vaccination: छतरपुर. नईदुनिया प्रतिनिधि। छतरपुर के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर पदस्थ एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने अपने जोश, जुनून और जज्बे से 16 जनवरी 2021 से शुरू हुए कोविड टीकाकरण अभियान में आज तक बिना कोई अवकाश लिए 61 हजार 141 लोगों को अकेले टीका लगाकर नया कीर्तिमान रच दिया है।

जिद के आगे जीत है का मूलमंत्र लेकर पूरी सेवा और समर्पण से टीकाकरण कार्य में लगी एएनएम माया अहिरवार छतरपुर के जिला अस्पताल में पदस्थ हैं। वे एक लाख लोगों का टीकाकरण करने का सेवाभावी जज्बा लेकर काम कर रही हैं। टीकाकरण शुरू होने से लेकर अब तक पूरे 8 महीने के दौरान माया ने एक भी दिन की छुटटी नहीं ली और 61 हजार 141 लोगों को अकेले टीका लगाकर ऐसा रिकार्ड बनाया है जो प्रदेश मेें एक मिसाल बन गया है। यहां तक कि वे रविवार को भी सेंटर पर जाकर लोगों का टीकाकरण करती हैं। टीकाकरण के श्ुरू में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को टीका लगाया। फिर जिले के कलेकटर, एसपी व अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियोें से लेकर आज तक आमजन के टीकाकरण में सतत रूप से 12 से 13 घंटे जुटी हुई हैं। इस कार्य में उनके इस जोश और जज्बे की सराहना हर किसी की जुबान पर है। वे जिला प्रशासन और राज्यपाल से भी सम्मानित हो चुकी हैं। छतरपुर के सीएमएचओ डॉ. सतीश चौबे का कहना है कि 16 जनवरी श्ुरू हुए टीकाकरण में डयूटी लगने के बाद से अाज तक माया ने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। वे दिनरात सेवा व समर्पण से लगातार काम कर रही हैं। उनका यह सेवाभाव अनुकरणीय है।

सेवाकार्य में परिवार का पूरा साथ मिला

लगातार 8 महीने से मानव सेवा का संकल्प लेकर 12 से 13 घंटे की डयूटी करके टीकाकरण में जुटी एएनएम माया अहिरवार को हर कदम पर परिवार का पूरा साथ मिला है। माया के परिवार में कलेक्ट्रेट में कार्यरत उनके पति बैजनाथ अहिरवार, एक बेटी और एक बेटा मिलाकर कुल 4 सदस्य हैं। परिवार का हर सदस्य उनके संकल्प मंे सहभागी है। टीकाकरण के काम में बाधा न आए इसके लिए सब अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। माया ने बताया कि वह पति के साथ सुबह 5 बजे उठकर घर का काम शुरू कर देते हैं। खाना बनाकर वह सुबह 9 बजे और 10.30 बजे पति अपनी-अपनी ड्यूटी पर निकल जाते हैं। शाम 5 बजे पति घर लौटकर बेटी के साथ मिलकर खाना बना लेते हैं। मैं देर रात 9 बजे घर लौट पाती है, मुझे अपने काम में कभी थकान का अहसास नहीं हुआ है। परिवार का साथ मिले बिना काम का लक्ष्य पूरा न कर पाने का जिक्र करते हुए माया का कहना है कि कोरोना काल में जब लोगों की जान जोखिम में हो, लोग एक दूसरे के पास जाना, छूना भी पसंद न कर रहे हों ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में मानव जीवन की सुरक्षा के लिए मैने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। मुझे गर्व है कि मैंने अपने शहर, प्रदेश और अपने देश के लोगों के लिए कुछ किया है। मैं तो यही कहूंगी कि अपने काम के प्रति समर्पित रहकर लगन और मेहनत से प्रयास करें तो कामयाबी कदम जरूर चूमेगी।

Posted By: anil.tomar