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सूखे बुंदेलखंड के लिए भगीरथ बन गईं हजारों जल सहेलियां

Updated: | Thu, 24 Sep 2020 03:22 PM (IST)

दिलीप सोनी, छतरपुर। घूंघट की ओट से बाहर निकलकर अपनी मेहनत से जलधारा बहाने वाली जल सहेलियां सूखे बुंदेलखंड के लिए भगीरथ बन गई हैं। छतरपुर जिले के बड़ामलहरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत भेलदा के एक छोटे से गांव अंगरोठा में 400 से अधिक महिलाओं (जल सहेलियों) ने 107 मीटर लंबे पहाड़ को काटकर ऐसा रास्ता तैयार किया है जिससे उनके गांव के तालाब में अब पानी भरने लगा है। महिलाओं ने जो बीड़ा उठाया है, उससे दशकों से सूखेपन का दंश झेल रहे इस अंचल में कई नवीन जल संरचनाओं का निर्माण हुआ है।

अंगरोठा में बुंदेलखंड पैकेज से तालाब का निर्माण कराया गया था परंतु जल स्रोत का कोई माध्यम न होने से तालाब हर साल बरसाती मौसम निकलने के बाद भी सूखा रहता था। जिससे गांव में पानी की समस्या थी।

यहां की महिलाओं ने खुद अपने गांव की पानी की समस्या का हल निकालने के लिए बीड़ा उठाया और जल संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रही परमार्थ समाज सेवी संस्थान के सहयोग से लगभग 107 मीटर लंबे पहाड़ को काटकर एक ऐसा रास्ता बनाया है जिससे उनके गांव के तालाब में अब पानी भरने लगा है।

परमार्थ समाजसेवी संस्थान मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर और दमोह के साथ उत्तरप्रदेश के झांसी, महोबा, ललितपुर, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट और जालौन में के सहयोग से एक हजार से अधिक जल सहेलियों के माध्यम से जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रही हैं।

18 महीनों में मिल पाई सफलता

जल सहेली बबीता राजपूत बताती हैं कि दूर-दूर से 3 किलोमीटर पैदल चलकर महिलाएं यहां पर आती थी और श्रमदान करती थीं। लगभग 18 महीनों की मेहनत के बाद परिणाम सबके सामने हैं। ग्रेनाइट पत्थरों की बड़ी रुकावट को पार करने के लिए मशीन का भी सहारा लिया गया।

महिलाओं ने पर्वत पर पौधे लगाने और पर्वत को बचाने का संकल्प भी लिया है। लगभग 11 तालाबों का पुनरुद्धार भी हो चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तालाब के भरने से सूखी हुई बछेड़ी नदी एक बार फिर से जी उठेगी। जो केवल बरसात में बहा करती थी, वह 12 महीने बहेगी।

40 एकड़ के तालाब में भर गया 70 एकड़ तक पानी

जल जन जोड़ो अभियान के राज्य संयोजक मानवेंद्र सिंह बताते हैं कि ग्राम भेलदा में पहाड़ों के जरिए बरसात का पानी बहकर निकल जाता था। इस पानी को सहेजकर महिलाओं ने गांव की दशा और दिशा बदल कर रख दी है। अब इस 40 एकड़ के तालाब में लगभग 70 एकड़ तक पानी भर रहा है। सूखे कुओं में पानी आ चुका है, हैंडपंप भी दोबारा पानी देने लगे हैं। किसान अब कृषि के सुनहरे भविष्य की कल्पना कर रहे हैं।

जल सहेलियों पर एक नजर

* पानी पर महिलाओं की हकदारी के लिए तैयार हुईं थी जल सहेलियां

* प्रत्येक गांव में एक पानी पंचायत जिसमें 15 से 25 महिलाएं सदस्य

* इन सदस्यों में से दो जल सहेलियों का चयन किया गया है

* छतरपुर जिले में लगभग दो सौ जल सहेलियों ने बना डाले 11 डैम, टीकमगढ़ जिले में भी कर रहीं काम

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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