अंतरराष्ट्रीय मृदा दिवस पर विशेष: मध्‍य प्रदेश के युवा किसानों ने रसायनों से बनाई दूरी, लौटी मिट्टी की उर्वरता

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 07:49 AM (IST)

गोबर और हरित खाद का प्रयोग, देसी कीटनाशकों का इस्तेमाल यह हुआ फायदा

मिट्टी की उर्वरा शक्ति लौटी, उत्पादन में भी हो रहा सुधार

50 हजार हेक्टेयर में रसायन मुक्त खेती होने लगी है अब

प्रेमविजय पाटिल,धार । यदि मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो जाए तो फसल चक्र भी प्रभावित हो जाता है। ऐसी ही स्थिति मध्य प्रदेश के धार जिले में कुछ वर्ष पहले दिखने लगी थी। यहां मिट्टी में कार्बन की मात्रा कम होने लगी। मिट्टी में प्रति बीघा 0.5 प्रतिशत कार्बन की मात्रा होनी चाहिए, लेकिन उर्वरकों और रासायनिक दवाइयों के इस्तेमाल से इसकी मात्रा घटकर 0.2 प्रतिशत हो गई थी। इससे सोयाबीन फसल का उत्पादन 40 प्रतिशत प्रति बीघा तक घट गया। चिंतित क्षेत्र के युवा किसानों ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने का बीड़ा उठाया।

खेतों में गोबर और हरित खाद का प्रयोग शुरू किया। रासायनिक कीटनाशक के बजाए देसी कीटनाशकों का इस्तेमाल करने लगे। परिणाम सुखद रहा। मिट्टी की उर्वरा शक्ति फिर लौट आई। युवा किसानों ने आसपास के गांवों में भी लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया। अब करीब 50 हजार हेक्टेयर में रसायन मुक्त खेती हो रही है। ग्राम राजपुरा के किसान रवि चोयल बताते हैं कि वे पिछले चार वर्षों से 30 बीघा खेती में गोबर खाद डालने लगे हैं। हालांकि गोबर खाद डालना महंगा पड़ता है, लेकिन मिट्टी की सेहत यह सबसे जल्दी सुधारता है।

इसके अलावा हरित खाद और जैविक खाद को भी अपनाया है। मिट्टी परीक्षण करवाकर पता करते हैं कि किस तरह से गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। अब क्षेत्र का लगभर हर किसान थोड़ी-थोड़ी जमीन पर जैविक खेती की शुरुआत कर चुका है। यूरिया का उपयोग 40 प्रतिशत तक घटा दिया है। ग्राम लबरावदा के किसान नरेंद्र राठौड़ ने हर फसल चक्र में जैविक पदार्थों का ही अपने खेत में उपयोग किया है।

एनजीओ भी कर रहे मदद

युवा किसानों की इस पहल में जिले में काम कर रहे गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) भी मदद कर रहे हैं। वे गांवोंं में जाकर किसानों को रसायनों का उपयोग कम करने, जैविक खेती को प्रायोगिक तौर पर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। ताकि पैदावार बढ़ सके। कृषि विज्ञान केंद्र धार के प्रभारी डा. एके बड़ाया ने बताया कि मिट्टी में 0.5 प्रतिशत कार्बन की मात्रा होनी चाहिए। वरना उत्पादन में 25 से 40 प्रतिशत की गिरावट होती है।

इनका कहना है

किसान मृदा की सेहत को लेकर जागरूक हुए हैं। कई इलाकों से हमें किसान मार्गदर्शन के लिए फोन करते हैं। केंद्र पर आकर संपर्क भी करते हैं। किसानों को मिट्टी परीक्षण करवाना चाहिए और उसके परिणाम के आधार पर खेती करनी चाहिए।

-डा. एसएस चौहान, मृदा वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, धार

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay