Dengue in Gwalior: आंकड़ाेंं की बाजीगरी में जुटा विभाग, कागजाें में अभियान,हकीकतः 21 दिन में तीन बच्चों की मौत

Updated: | Sat, 23 Oct 2021 09:52 AM (IST)

Dengue in Gwalior: अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। डेंगू का डंक जानलेवा हो गया है। पिछले 21 दिन में शहर में तीन बच्चों की मौत हो गई और बीमार मरीजों की आंकड़ा एक हजार के पार हो गया है। इसके बावजूद प्रशासन डेंगू के रोकथाम के लिए गंभीर नहीं दिखाई देता। सरकारी आंकड़ों में अब तक भी एक भी मरीज की मौत डेंगू से दर्ज नहीं है। वहीं नाम छापने की शर्त पर केआरएच के डाक्टर का कहना है कि अब तक डेंगू से मरने वाले बच्चों की संख्या एक दर्जन से अधिक हो गई है। हालांकि इन बच्चों की जांच जीआर मेडिकल में नहीं हुई है। यह अन्य अस्पतालों से रेफर होकर केआरएच में भर्ती हुए थे। यहां हर दिन पांच से सात डेंगू पीड़ित बच्चे भर्ती होते हैं। अभी भी करीब 30 से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है। वहीं शुक्रवार को भी निजी अस्पताल में भर्ती शिवपुरी निवासी रामश्री की भी डेंगू के चलते मौत हुई है।

अब जानलेवा हो चुके डेंगू की रोकथाम पर अभी शासन-प्रशासन एक्टिव मोड नें नहीं आया है। सिर्फ जिला मलेरिया विभाग व नगर निगम का स्वास्थ्य अमला फागिंग व लार्वा सर्वे की खानापूर्ति कर रहा है। मलेरिया विभाग के अनुसार शहर में सबसे अधिक मरीज डीडी नगर, आदित्यपुरम, शताब्दीपुरम, पिंटो पार्क और गोला का मंदिर क्षेत्र में पाए गए। वार्ड 18 में अब तक 80 मरीज मिल चुके हैं। जबकि वार्ड 19 में 38, 20 में 30, 21 में 27, 29 में 35, 55 में 22, 56 में 13 और वार्ड 65 में 17 मरीज मिल चुके हैं। यह वह रिकार्ड है जिनकी जांच जीआर मेडिकल कालेज या जिला अस्पताल की लैब में हुई है। निजी लैब पर होने वाली जांचों का आंकड़ा इसमें नहीं है।

सिकंदर कंपू में एक दर्जन बच्चे पीड़ित: शहर के केवल सिकंदर कंपू क्षेत्र में ही एक दर्जन से अधिक बच्चे डेंगू से पीड़ित हैं। यह निजी अस्पताल में इलाज ले रहे हैं। हालांकि इनमें कुछ बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं। शहर में मिल रहे डेंगू मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है।

दादा बोले- मैंने तो अपना लाड़ला नाती खो दिया, आप रखें सावधानीः डेंगू को सामान्य बीमारी न समझें, यह जानलेवा साबित हो रहा है। यह मेरे पांच साल के मासूम विराज को निगल चुका है, लेकिन आप सभी अपना और अपने बच्चों की देखरेख में कतई लापरवाही न बरतें। घर व आसपास साफ-सफाई रखें और साफ पानी जमा न होने दें। यदि बुखार आए तो सिर्फ दवाओं से काम न चलाएं। समय रहते डाक्टर से परामर्श लेकर डेंगू की जांच कराएं और इलाज लें। यह कहना है सिकंदर कंपू निवासी राजेन्द्र नाथ दुबे का। उन्होंने बताया कि उनका हंसता-खेलता पांच वर्षीय नाती विराज कुछ ही दिन में मौत के आगोश में समा गया। उसे दो अक्टूबर को बुखार आया तो पास में एक क्लीनिक पर दिखाया। डाक्टर ने उसे मौसमी बीमारी बताते हुए तीन दिन इलाज दिया। जब नाती की हालत बिगड़ी तो उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में डेंगू रिपोर्ट पाजिटिव आई। विराज की तबीयत खराब होती गई तो उसे कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां छह अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद सिकंदर कंपू निवासी एक बच्ची और फिर लक्ष्मीगंज निवासी बालक विशाल गोयल की 12 अक्टूबर को डेंगू से मौत हो गई।

वर्जन-

मेरा बेटा डेंगू से पीड़ित हुआ था, अब वह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ चुका है। इसके बाद मेरी भतीजी व दूसरे बेटे को बुखार आ गया। उनकी डेंगू की जांच के लिए सैंपल भेजा है। क्षेत्र में हर दूसरे घर में मरीज हैं, पर लार्वा सर्वे व फागिंग के लिए कोई टीम नहीं आई।

अरविंद राजपूत, निवासी सिकंदर कंपू

वर्जन-

मेरे वार्ड में इस सीजन के दौरान अब तक एक दर्जन से अधिक डेंगू के मरीज निकल चुके हैं। इसके बाद भी सिर्फ एक दिन लार्वा सर्वे टीम हमारे क्षेत्र में आई और घर के बाहर से ही लोगों से परिवार में बीमार स्वजन के नाम नोट करके चली गई।

माेनू तोमर, निवासी सिकंदर कंपू

वर्जन-

मेरी जानकारी में सिर्फ वही केस आते हैं, जिनकी डेंगू जांच रिपोर्ट मेडिकल कालेज या जिला अस्पताल की लैब से आती है। इनके अनुसार एक बच्चे की अक्टूबर में डेंगू से मौत हुई है। सिकंदर कंपू में दो बच्चों की मौत डेंगू से हुई तो उसकी जानकारी हमें भेजिए। मैं टीम भेजकर वहां पर लार्वा सर्वे व फागिंग कराती हूं।

डा. नीलम सक्सेना, प्रभारी मलेरिया अधिकारी

Posted By: vikash.pandey