Dol Gyaras 2021: सर्वार्थ सिद्धि योग में कल मनेगी डोल ग्यारस, शुरू हो जाएगा गणेश विसर्जन

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 03:00 PM (IST)

Dol Gyaras 2021: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। डोल ग्यारस भाद्रपद मास की एकादशी तिथि 17 सितंबर, शुक्रवार को देशभर में मनाई जाएगी। इसे जलझूलनी या पदमा एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान के वामन रूप का अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन भगवान वामन की आराधना की जाती है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि एकादशी तिथि की शुरुआत गुरुवार सुबह 9:37 बजे से हुई है, समाप्ति शुक्रवार सुबह 8:08 बजे होगी। एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा, जो सुबह 6:03 बजे से मध्य रात्रि 3:36 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि भगवान विष्णु की चार माह की निद्रा में एक समय ऐसा भी आता है, जब वे सोते हुए करवट बदलते हैं। इसी दिन को पार्श्व या परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप का जलवा पूजन किया गया था। इस कारण इस दिन भगवान कृष्ण के बालरूप बालमुकुंद को एक डोल में विराजमान करके उनकी शोभा यात्रा निकाली जाती है। भगवान विष्णु व कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। इसलिए इसे डोल ग्यारस कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी के दिन व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। वाजपेय यज्ञ का फल से मतलब है कि इसका व्रत करने से व्यक्ति के सब कार्य सिद्ध होते हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग होने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा राक्षस आदि की योनि से भी छूटकारा मिलता है। संसार में इसके बराबर कोई दूसरा व्रत नहीं है। व्रत की कथा पढ़ने और सुन लेने भर से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिल जाता है।

शुरू होता है गणेश विसर्जनः ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी ने बताया कि शुक्रवार को परिवर्तनीय एकादशी मनाई जाएगी, जिसे जलझूलनी डोल ग्यारस एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन से भगवान गणेश के विसर्जन की शुरुआत होती हैं, जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। पंचांग में भादाै शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 16 सितंबर को पूरे दिन रहेगी, लेकिन इस दिन सूर्योदय एकादशी तिथि के पूर्व हुआ है। ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के अनुसार जलझूलनी परिवर्तन एकादशी का व्रत 17 सितंबर के दिन रखना शास्त्र सम्मत होगा। एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन चावल, शक्कर, दही, चांदी की वस्तुओं को दान करना अति शुभ फलदाई होता है। सोनी के अनुसार इस दिन सूर्यदेव अपनी राशि को परिवर्तन करके कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इससे कन्या संक्रांति का निर्माण होगा। ज्योतिष में जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है।

Posted By: vikash.pandey