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Gwalior Black Fungus News: आधा सैकड़ा मरीज, 12 करा चुके हैं आपरेशन

Updated: | Sat, 15 May 2021 11:08 AM (IST)

Gwalior Black Fungus News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगे स्वास्थ्य महकमे और प्रशासन के लिए अब ब्लैक फंगस ने मुसीबत खड़ी कर दी है। शहर में ब्लैक फंगस के मामलों की संख्या एक-दो नहीं बल्कि आधा सैकड़ा के पार हो चुकी है। आंख, नाक, कान, गला व दंत रोग विशेषज्ञ ब्लैक फंगस का इलाज करने के साथ ही इसके खतरे और तीव्रता को भी समझने में लगे हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि ब्लैक फंगस के उनके पास अब तक आधा सैकड़ा मरीज आ चुके हैं। जिसमें एक्सपर्ट डाक्टर ब्लैक फंगस से शिकार एक दर्जन मरीजों का ऑपरेशन कर भी चुके हैं। मौजूदा वक्त में इस बीमारी में काम आने वाली दवा(एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन) की शहर में उपलब्धता नहीं हो पा रही है।

नाक के जरिए फैलता है फंगसः ब्लैक फंगस नाक के जरिए प्रवेश करता है। नाक से साइनस(आंख के नीचे की हड्डी) तक पहुंचता है, साइनस से आंख और इसके बाद फंगस ब्रेन तक पहुंंच जाता है। हड्डी की रिक्त स्थानों पर फंगस जमा हो जाता है और वहीं पर बढ़ने लगता। इससे आंख की रोशनी तक चली जाती है और आंख बाहर की ओर निकल आती है। ब्रेन में जाने से आक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती और ब्रेन डेड हो सकता है। नाक-मुंंह व आंख के जरिए भी फंगस फैल सकता है।

विशेषज्ञ की सलाह: इन लक्षणाें काे न करें नजरअंदाजः

-अपोलो अस्पताल के डेंटल एवं मैग्जीलोफेशियल विशेषज्ञ का कहना है कि कोविड के इलाज के साथ मरीज का नेजल व ओरल चेकअप भी किया जाए या ऐसे मरीज जिनमें लक्षण हों वह अपनी जांच स्वयं कराएं। मरीज अगले 45 दिन लक्षण पर ध्यान दे,बीटाडीन सोल्यूशन से नेजल स्प्रे करे। इससे यदि फंगस नाक में होगा तो वह काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाएगा।

-नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप राठौड़ का कहना है कि यदि व्यक्ति को कुछ विशेष लक्षण दिखें तो नजर अंदाज न करें। जैसे चेहरे पर सुन्न्पन, सुबह जागने पर निश्चित दूरी पर रखी वस्तु को देखने में नजर में परिवर्तन महसूस करना। किसी एक आंख या पलक में सूजन आए, कोई एक वस्तु दो दिखाई देना, आंख में लालपन या दर्द महसूस होना।

-ईएनटी विशेषज्ञ: डा. रविन्द्र जैन (ईएनटी विशेषज्ञ) के अनुसार पोस्ट कोविड मरीज में तेजी से फैल रहा है।

इसका कारण कोविड को हराने के लिए स्ट्रेरॉइड का प्रयोग किया जाता, जिससे शुगर बढ़ जाती है। फैरेटिन (आयरन की मात्रा का बढ़ना) बढ़ जाती है। इन तीनों के बढ़ने से रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। फंगस वातावरण में ,दूषित पानी में, और सामान्य स्र्प से व्यक्ति के मुंह व नाक में भी पाया जाता है। सामान्य व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से वह असर नहीं करता पर रोगी में यह तेजी से अपना प्रभाव दिखाता है।

बीमारी के लक्षणः यदि सुबह के समय नाक साफ(छिनकते) करते समय या मुंह से खकार डार्क ब्राउन, काला या खून का कतरा आए, आंख, सिर में दर्द, सूजन, चहरे में सुन्न्पन आए तो तत्काल डाक्टर से परामर्श लें।

वर्जन

अब तक आधा सैकड़ा मरीजों में ब्लैक फंगस की शिकायत देखी जा चुकी है। इनमें कुछ मरीजों में जटिलता को देखते हुए शहर से बाहर इलाज कराने की सलाह दी है। दर्जन भर मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है।

डा. राजवीर यादव, विशेषज्ञ डेंटल एडं मैग्जीलोफेशियल

वर्जन-

ब्लैक फंगस की राेकथाम के लिए एहतियात समुचित कदम उठा लिए गए हैं। एेसे मरीजाें के लिए जेएएच में दस बेड का वार्ड भी तैयार किया है। ब्लैक फंगस में उपयाेग आने वाली दवाई भी शासन द्वारा जल्द ही उपलब्धता कराई जाएगी। ब्लैक फंगस के लक्षण आने वाले मरीजाें की जांच के लिए जेएएच में विशेषज्ञ डाक्टराें की टीम तैनात कर दी गई है।

डा मनीष शर्मा, सीएमएचआे ग्वालियर

Posted By: vikash.pandey
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