Gwalior Consumer Forum News: कोविड से मौत का क्लेम न देना सेवा में कमी है, 45 दिन में भुगतान किया जाए

Updated: | Tue, 26 Oct 2021 07:41 PM (IST)

- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने दिया आदेश

Gwalior Consumer Forum News: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। कोविड-19 की पहली व दूसरी लहर में लोगों ने अपने पैसों से इलाज कराया था। उसकेबाद बीमा कंपनियों पर इलाज के खर्च का दावा किया। कंपनियों ने बीमा क्लेम को खारिज कर दिया। इसके बाद यह विवाद उपभोक्ता फोरम में पहुंचे। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने एक केस के निराकरण में कोविड से मौत का क्लेम नहीं देना सेवा में कमी माना है। आवेदनकर्ता के परिवाद को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि आवेदन पर फिर से विचार किया जाए। 45 दिन के भीतर क्लेम की राशि भुगतान की जाए। राशि पर आठ फीसद ब्याज भी दिया जाए। साथ ही आवेदनकर्ता को केस लड़ने का अलग से खर्च दो हजार रुपये दिए जाएं।

आज्ञापाल सिंह ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से हेल्थ शील्ड मास्टर प्लान लिया था। यह पालिसी 22 फरवरी 2020 से 21 फरवरी 2024 तक के बीच की थी। इस पालिसी का बीमित मूल्य तीन लाख रुपये था। आज्ञापाल सिंह कोविड की पहली लहर में संक्रमित हो गए। उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। 5 अक्टूबर 2020 को उनकी कोविड से मौत हो गई। आज्ञापाल सिंह की पत्नी ने इलाज में खर्च हुए पैसे का दावा बीमा कंपनी पर किया। इलाज में खर्च हुए तीन लाख रुपये मांगे, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि आज्ञापाल सिंह की जिस बीमारी से मौत हुई है, वह क्रिटिकल इलनेस के तहत नहीं आती है। इसलिए बीमित राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता है। गुलजीत कौर ने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में दावा पेश किया। फोरम ने उनके आवेदन को स्वीकार कर बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि उनके आवेदन पर फिर से विचार करे। पालिसी के तहत भुगतान योग्य राशि है, उसे 45 दिन में अदा करे। 21 जनवरी 2021 से आठ फीसद ब्याज भी अदा करना होगा।

इन बिंदुओं पर फोरम ने किया विचार

- बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि जब पालिसी कराई थी, तब कोविड संक्रमण नहीं था। कोविड क्रिटिकल इलनेस बीमारी में शामिल नहीं थी। इसलिए बीमा क्लेम का आवेदन अस्वीकार किया गया।

- आवेदनकर्ता ने आइआरडीए (बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण्ा) की कापी पेश की। 4 मार्च 2020 के आइआरडीए ने एक आदेश निकालकर कोविड बीमा क्लेम में शामिल किया था।

- फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला दिया कि बीमा कंपनियां आइआरडीए के निमयों के तहत चलती है। आइआरडीए ने कोविड बीमारी को अधिसूचित किया है। इसलिए बीमा कंपनी ने आइआरडीए के नियम के खिलाफ जाकर कार्य किया है।

आदेश से बड़ी राहत

- फोरम ने कोविड-19 के क्लेम से जुड़ा पहला केस निराकृत किया है, क्योंकि कोविड-19 के दौरान बड़ी संख्या में क्लेम खारिज किए थे, जिसके चलते लोगों ने फोरम में परिवाद दायर कर अपने इलाज का खर्च मांगा है।

- 1 जनवरी से 26 अक्टूबर तक फाइल हुए केसों में 29 फीसद केस बीमा कंपनियों से जुड़े हैं।

Posted By: anil.tomar