Gwalior Court News: कलेक्टर की जांच रिपाेर्ट हाईकाेर्ट में पेश की, बताया-अचलेश्वर ट्रस्ट में न्यासियों ने गंभीर अनियमितताएं की हैं

Updated: | Tue, 03 Aug 2021 03:45 PM (IST)

Gwalior Court News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ में कलेक्टर ने अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास की जांच रिपोर्ट सौंप दी। कलेक्टर की ओर से बताया गया है कि अचलेश्वर ट्रस्ट में न्यासियों ने गंभीर अनियमितताएं की हैं। जिस उद्देश्य के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था, उसको पूरा करने में ट्रस्ट असफल रहा है। दान में मिलने वाले आभूषण व वस्तुओं का रजिस्टर संधारित नहीं किया है, न ही बैलेंसशीट में इसका उल्लेख है। आभूषणों के गबन व चोरी से इंकार नहीं किया जा सकता है। कलेक्टर की ओर से तर्क दिया है कि उन्हें जांच करने तक का अधिकार है, लेकिन कार्रवाई का अधिकार जिला न्यायाधीश को है। जिला न्यायाधीश को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी है।

संतोष सिंह राठौर ने अचलेश्वर ट्रस्ट में की जा रही अनियमितताओं को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि ट्रस्ट में पैसों का हिसाब नहीं रखा जा रहा है। ट्रस्ट का जो लोग संचालन कर रहे हैं, वह फंड का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्माण में भी मनमानी की है। कोर्ट ने याचिका पर 21 नवंबर 2019 को अंतिम फैसला सुनाया था। कलेक्टर को आदेश दिया था कि कलेक्टर ट्रस्ट की जांच तीन महीने में पूरी कराएं। जो रिपोर्ट आए, उस पर अंतिम फैसला लें। कलेक्टर ने ट्रस्ट की जो रिपोर्ट आई, उस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसके चलते संतोष सिंह राठौर ने हाई कोर्ट में जनवरी 2021 में अवमानना याचिका दायर की। मार्च में कलेक्टर को नोटिस जारी हो गए थे। नोटिस तामील भी हो गए, लेकिन जवाब नहीं दिया गया। इस मामले में कलेक्टर जवाब पेश नहीं कर रहे थे। हाई कोर्ट ने कलेक्टर को 25 हजार रुपये के जमानती वारंट पर तलब किया था। कलेक्टर की ओर से सोमवार को अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरके सोनी व अधिवक्ता अभिषेक बिंदल उपस्थित हुए। उन्होंने अचलेश्वर ट्रस्ट की जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश कर दी। इस याचिका की सुनवाई 9 अगस्त को संभावित है।

ट्रस्ट में यह अनियमितताएं पाई गईंः

- संतोष सिंह राठौर की शिकायत के बाद एक जांच दल बनाया गया था। जांच दल ने ट्रस्ट की जांच की। इस जांच में सामने आया कि आरके गुप्ता एंड कंपनी चार्टड अकाउंटेंट से वित्त वर्ष 2012-13 व 2018-19 का आडिट कराया गया। न्यास की बैलेंससीट में संपत्ति का बाजार मूल्य उल्लेख नहीं किया गया है।

-अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास का गठन 23 जून 2005 में जिला न्यायाधीश के आदेश पर किया गया था। न्यास अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है। गरीब व पिछड़े वर्गों के शैक्षणिक व सामाजिक उत्थान के कार्य न्यास ने पूरी क्षमता से नहीं किए हैं। न्यास की गतिविधियाें का संचालन लोक न्यास अधिनियम 1962 के अनुसार नहीं हो रहा है।

-मंदिर के पास फूल, प्रसाद की दुकानें है। इन दुकानों से प्राप्त होने वाले किराए का आय-व्यय में उल्लेख नहीं है।

-मंदिर में प्राप्त होने वाली दान की वस्तुओं का रजिस्टर संधारण नहीं है, न ही बैलेंसशीट में दिखाया गया है। दान में प्राप्त वस्तुओं के गबन व चोरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

-अचलेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य बिना खुली निविदा के कराया गया है। निर्धारित समयावधि में कार्य पूरा नहीं किया गया। निर्माण कार्य के बिना प्रमाणीकरण के 1.58 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है।

- ट्रस्ट में गबन व धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाए गए नियमों का भी ट्रस्टियों ने उल्लंघन किया है।

Posted By: vikash.pandey