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Gwalior Court News: तथ्य छिपाने पर कोर्ट ने वकील पर लगाया 10 हजार का हर्जाना

Updated: | Tue, 22 Jun 2021 07:41 PM (IST)

- अग्रिम जमानत के आवेदन को किया खारिज, दस्तावेजों की सही जांच नहीं करने पर विभागीय जांच के भी दिए आदेश

Gwalior Court News:ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अग्रिम जमानत में तथ्य छिपाना एक अधिवक्ता को महंगा पड़ गया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए अधिवक्ता के व्यवहार पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने वकील पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए कहा कि वे भविष्य में संस्था के साथ ईमानदारी से पेश आएंगे। यदि सात दिन में हर्जाने की राशि जमा नहीं करते हैं तो प्रिसिंपल रजिस्ट्रार कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं। साथ ही दस्तावेजों की सही जांच नहीं करने वाले कोर्ट के कर्मचारियों की भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

सिद्धांत जैन व लक्ष्मी जैन के खिलाफ विदिशा जिले के सिरोंज थाने में धारा 406 व दहेज एक्ट के अपराध में मामला दर्ज है। इन दोनों आरोपितों ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 23 अप्रैल 2021 को सौरभ जैन को अग्रिम जमानत मिल गई है। इस प्रकार उनका मामला भी समान होने से उन्हें भी अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए, लेकिन न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन के साथ याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस तथ्य को न्यायालय के सामने नहीं रखा कि इस मामले में एक अन्य आरोपित विनय कुमार जैन के अग्रिम जमानत आवेदन को न्यायालय ने 31 मई 2021 को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने तथ्यों को देखने के बाद कहा कि तीनों जमानत याचिकाएं एक ही अधिवक्ता ने प्रस्तुत की हैं। यह विचलित करने वाली बात है। इससे यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता इस मामले के सभी तथ्यों से अवगत थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान इस बात का खुलासा नहीं किया कि विनय जैन की जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। इस प्रकार तथ्यों को सामने न रखकर धोखाधड़ी की कोशिश की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी नहीं बताया गया कि इससे पूर्व विनय कुमार जैन के जमानत आवेदन को खारिज किया गया है, वे सिद्धांत जैन के पिता हैं और लक्ष्मी जैन के पति हैं। कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग के कर्मचारियों ने इनके आवेदन को सही तरीके से नहीं जांचा। इस पर कोई आपत्ति भी नहीं की गई। इस प्रकार इस मामले में सेक्शन अधिकारी की भी अपने कर्तव्य के पालन में लापरवाही रही है। इसलिए प्रिंसिपल रजिस्ट्रार को यह निर्देश दिए जाते हैं कि इस मामले में विभागीय जांच की जाए। अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। ज्ञात हो कि आरोपितों ने डा. विभोर जैन के विवाह में 25 लाख रुपये का अतिरिक्त दहेज मांगा था। इसके चलते आरोपितों पर दहेज अधिनियम व 406 के तहत केस दर्ज है।

Posted By: anil.tomar
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