Gwalior Court News: धोखाधड़ी में एक को सात साल की सजा, जांच अधिकारी की विभागीय जांच के आदेश

Updated: | Tue, 28 Sep 2021 11:24 AM (IST)

Gwalior Court News: ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अपर सत्र न्यायालय ने महिला के साथ धोखाधड़ी के मामले में कृष्ण कुमार सिंह चौहान को सात साल की सजा सुनाई है और 13 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है, जबकि केनरा बैंक के मैनेजर को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करना पड़ा। कोर्ट ने जांच अधिकारी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंक मैनेजर को बचाने के लिए जानबूझकर गलती की है। इसलिए जांच अधिकारी की विभागीय जांच कराना न्यायोचित रहेगी। आदेश की कापी डीजीपी को भेजने के निर्देश दिए हैं, जबकि एक अन्य आरोपित इस मामले में फरार है।

अपर लोक अभियोजक गजेंद्र साहू ने बताया कि मिथलेश जादौन को अपनी बेटी के विवाह के लिए ऋण लेना था। जब वह बैंक पहुंची तो बैंक वालों ने कहा कि उनके मकान पर लिमिट बना देते हैं। हस्ताक्षर कराने के बाद बैंक ने उन्हें चेकबुक या अन्य दस्तावेज नहीं दिए, लेकिन उनके खाते से पैसे ट्रांसफर हो रहे थे। इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने शिकायत की। 13 मार्च 2013 से 16 फरवरी 2017 के बीच केनरा बैंक के माध्यम से 12 लाख 60 हजार रुपये निकाल लिए। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने की। क्राइम ब्रांच की जांच में बैंक का फर्जीवाड़ा सामने आया। पुलिस ने कृष्ण कुमार चौहान निवासी रिवरव्यू कालोनी, आशीष कुमार शुक्ला मैनेजर केनरा बैंक सहित सचिन सोनी को आरोपित बनाया। पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट ने कृष्ण कुमार चौहान को सात साल की सजा सुनाई है। आशीष शुक्ला को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने आशीष शुक्ला की जानबूझकर मदद की है। इसके चलते वह दोषमुक्त हुए। जांच अधिकारी की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। सचिन सोनी को फरार घोषित कर दिया है।

जांच अधिकारी ने ऐसे की मदद

- मिथलेश जादौन से दस्तावेज जब्त नहीं किए गए। जांच अधिकारी की कार्रवाई महज एक औपचारिकता पूर्ण दिख रही है।

- यदि मामले की वास्तविक जांच की जाती तो आशीष शुक्ला व कृष्ण कुमार सिंह चौहान के हस्ताक्षरों की जांच कराई जाती। हस्ताक्षरों की हेंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच करानी थी। असल दस्तावेज भी जब्त किए जाने थे। ऐसा कुछ नहीं किया गया।

Posted By: anil.tomar