Gwalior Court News: चिड़ियों को दाना पानी खिलाएं याचिकाकर्ता, प्रोजेक्ट को क्यों रोक रहे: कोर्ट

Updated: | Tue, 26 Oct 2021 07:53 PM (IST)

- कमेटी की रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश करने दिया समय

Gwalior Court News :ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता के संबंध में सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि याचिकाकर्ता क्या काम करते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वे समाजसेवा का काम करते हैं। दाना पानी नाम से एक संस्था संचालित करते हैं। चिड़ियों को दाना खिलाते हैं। कोर्ट ने कहा कि ये चिड़ियों को दाना खिलाएं, प्रोजेक्ट को क्यों रोक रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि ये पेड़ काटकर शहर के फेफड़ों को खराब करना चाहते हैं। कोर्ट ने बहस के बाद कमेटी की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता को आपत्ति पेश करने के लिए समय दे दिया है। कमेटी की रिपोर्ट को रिकार्ड पर ले लिया है।

राज चड्डा व आनंद नारायण ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि प्रदेश के 10 शहरों में पुनर्घनत्वीकरण योजना 2016 से लागू की है। इस योजना के लिए जहां जगह चिह्नित की है, उस जगह पर पेड़ खड़े हो हुए हैं। योजना में पेड़ों का जिक्र नहीं किया गया है, जो पेड़ काटे जाएंगे, उनकी पूर्ति कहां की जाएगी। थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के लिए चंबल कालोनी की जगह चिह्नित की है। यहां पर चार हजार पेड़ खड़े हैं। हाई कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने पेड़ों की गिनती की। गिनती में 3224 पेड़ निकले हैं, जबकि हाउसिंग बोर्ड 1080 पेड़ बता रहा था। दोगुना पेड़ अधिक निकले हैं। कमेटी के साथ-साथ याचिकाकर्ता ने भी पेड़ों की गिनती की है। कमेटी ने पेड़ों की गिनती सही से नहीं की है। कमेटी की रिपोर्ट पर उन्होंने आपत्ति की है। आपत्तियों को पेश करने के लिए समय दे दिया है। नवंबर के दूसरे सप्ताह में याचिका की सुनवाई संभावित है।

याचिकाकर्ता की ये हैं आपत्तियां

- याचिकाकर्ता ने भी पेड़ों की अलग से गिनती की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 1421 पेड़ों को छोड़ दिया है, जिनकी कमेटी ने गिनती नहीं की है। जब पेड़ों की गिनती की जा रही थी। उन्हें बुलाया गया। एक दिन ही कमेटी के साथ रह सके।

- चंबल कालोनी की 30 हेक्टेयर भूमि पर 4621 पेड़ खड़े हैं। उन्होंने एक-एक पेड़ गिने हैं, जबकि कमेटी ने छोड़ दिए हैं।

-हाउसिंग बोर्ड की व्यवस्थित डीपीआर नहीं है।

Posted By: anil.tomar