Gwalior Divorce News: लड़की की शादी की उम्र, माता पिता 19 साल से लड़ रहे तलाक का केस

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 05:56 PM (IST)

Gwalior Divorce News: बलवीर सिंह. ग्वालियर। कुटुंब न्यायालय में एक पति-पत्नी का झगड़ा 19 साल से लंबित है। पति तलाक के लिए और पत्नी भरण पोषण के लिए केस लड़ रही है। दोनों का विवाद सुप्रीम कोर्ट से होते हुए फिर कुटुंब न्यायालय में आ गया है। पति की जिद पत्नी को भरण पोषण नहीं देने की है, जबकि पत्नी अपने भरण पोषण के लिए लड़ रही है। कोर्ट ने आदेश भी किए, लेकिन पति भरण पोषण का पैसा नहीं दिया। पत्नी ने भरण पोषण का पैसा लेने के लिए कुटुंब न्यायालय में एक और केस दायर किया है।

पति-पत्नी के झगड़े को देखते दोनों की बच्ची की उम्र शादी हो गई है। बच्ची ने भी बचपन से कचहरी के चक्कर काटे है। पति ने लाखों रुपये वकीलों की फीस पर खर्च कर दिए, लेकिन पत्नी को पैसा देने को तैयार नहीं है। अपने केस में पति ने 40 वकील बदल दिए हैं। यह झगड़ा रेलवे के इंजीनियर व उसकी पत्नी के बीच का है। इंजीनियर कोर्ट में पत्नी से झगड़ते-झगड़ते सेवा निवृत्त की उम्र पर पहुंच गया है।

शक की वजह से आई दरार

पति के शक के चलते पत्नी से विवाद शुरू हुआ था। पति के शक के चलते पत्नी को घर छोड़ना पड़ा। अधिवक्ता पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि कोर्ट ने दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की। पत्नी ने पति के साथ जाने के लिए कई बार गुजारिश की, लेकिन पति साथ रखने को तैयार नहीं था। जबकि बेटी ने पिता को लेकर कहा कि जब उसे जरूरत थी, तब पिता ने साथ नहीं दिया। ऐसे पिता की उसे जरूरत नहीं है। वर्तमान में इंजीनियर रतलाम में कार्यरत है।

एक आवेदन का निराकण होता है दूसरा लगा देते है

- पति-पत्नी के बीच 19 कानून लड़ाई वेदनों के चलते खिंच गई। कोर्ट एक वेदन का निराकरण करता था, दोनों में एक कोई न कोई वेदन लगा देता था। जब कुटुंब न्यायालय के देश से संतुष्टी नहीं होती थी तो हाई कोर्ट चले जाते थे।

- कुटुंब न्यायालय व हाई कोर्ट के बीच वेदन लगाते-लगाते दोनों 19 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ ली। अधिवक्ता शर्मा कहना है कि जो भी केस निराकृत हु, उसके बाद दूसरा केस जाता था।

एक नजर केस पर

-1995 में इंजीनियर का विवाह ग्वालियर में हु था।

- 1996 में एक बेटी का जन्म। बेटी के जन्म के पति-पत्नी में विवाद शुरू।

- झगड़ों के चलते पत्नी ने 2000 में पति को छोड़ दिया।

-2002 से एक दूसरे खिलाफ कानून लड़ाई शुरू कर दी।

- पति ने तलाक का पहला केस खंडवा में दायर किया। लेकिन अधिकार क्षेत्र के धार पर तलाक का केस खारिज

- पत्नी ने भरण पोषण का केस ग्वालियर में दायर किया। 2008 में पत्नी को 2 हजार रुपये व बेटी को 1500 रुपये भरण पोषण देश दिया।

-पति-पत्नी ने हाई कोर्ट में भरण पोषण के देश के खिलाफ अपील दायर की। पत्नी भरण पोषण की राशि में बढ़ोतरी चाह रही थी। पति देना नहीं चाह रहा था। हाई कोर्ट ने दोनों की अपील खारिज की।

-पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के देश के खिलाफ एसएलपी दायर की। पहली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अतंरिम अादेश जारी करते हुए 10 हजार रुपये भरण पोषण दिए जाने का देश दिया। यह देश जब तक मिलना था, तब तक सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लंबित थी। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी को वकील ने वापस ले लिया। फिर से पत्नी को 2 हजार रुपये भरण पोषण हो गया।

- पत्नी ने फिर से भरण पोषण की राशि बढ़ाने के लिए कुटुंब न्यायालय में वेदन पेश किया। कुटुंब न्यायालय ने भरण राशि 11 हजार कर दी लेकिन पति ने इस राशि का भुगतान नहीं किया।

- पत्नी ने भरण पोषण की राशि की वसूली के लिए नया वेदन पेश किया है। वहीं पति का तलाक का केस भी लंबित है। पत्नी तलाक देने पर सहमत नहीं है।

Posted By: anil.tomar