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Gwalior Electricity News: सुधार पर 250 करोड़ खर्च, नतीजा अघोषित कटौती

Updated: | Sat, 12 Jun 2021 08:14 PM (IST)

- कभी गुल हो जाती है बत्ती, शहर बेहाल

Gwalior Electricity News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। सरकार ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग योजनाओं में शहर में 250 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मेंटेनेंस पर भी 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इस पैसे के निवेश के बाद जो दावे किए गए थे, वह सिर्फ कागजी ही साबित हुए हैं।अप्रैल से लेकर सितंबर तक अघोषित बिजली कटौती झेलता है इस बार जून में बिजली ने लोगों को बेहाल कर दिया है।कभी भी बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।लोगों का दिन व रात का चैन छीन लिया है। औसतन 2 से 3 घंटे तक लोगों को अघोषित कटौती झेलनी पड़ रही है। अधिकतर फीडर फाल्ट के हाट स्पाट बन गए हैं। कंपनी के अधिकारियों ने शासन की मंशा को भी पलीता लगा दिया है।यदि ग्वालियर रीजन की बात की जाए तो 1700 से ज्यादा पैसा खर्च हुआ है। ऊर्जा मंत्री भी स्वीकार कर चुके हैं कि ग्वालियर शहर में बिजली समस्या बढ़ी है।

सरकार ने लोगों को 24 घंटे बिजली देने के लिए वर्ष वर्ष 2011 में शहर में आरएपीडीआरपी (ऊर्जा सुधार कार्यक्रम) योजना लागू की थी। 2014 में योजना का काम खत्म हो गया। मीटरों को बाहर किया गया। फॉल्ट रोकने के लिए लाइनों की क्षमता बढाई गई। इस योजना के काम खत्म होने के बाद 24 घंटे बिजली का एलान कर दिया गया, लेकिन फाल्ट व ट्रिपिंग नहीं घटी। इसके बाद इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आइपीडीएस) योजना आई। योजना के तहत भी शहर को 50 करोड़ रुपये के करीब मिले, 2019 में काम खत्म हुआ।2011 से 2019 के बीच दोनों योजना का पैसा खर्च होने के बाद लाइनों में सुधार नहीं दिखा।जो समस्या 2011 के पहले थी, वही आज भी बनी हुई है। फाल्ट व ट्रिपिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। इस बार जून में पड़ी पांच दिन की गर्मी में बिजली ने लोगों की हालत खराब कर दी।

योजनाओं को लेकर किए हैं सबसे ज्यादा आंदोलन

आरएपीडीआर योजना के कामों के दौरान प्रद्युम्न सिंह तोमर व पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने आंदोलन किए थे। धरने व प्रदर्शन भी किए थे। इस योजना में अनियमितता का आरोप भी लगाए थे।शिकायतें भी की थी, लेकिन आज खुद ऊर्जा मंत्री है। इस योजना का सच उन्हें पता है।

- ठेकेदार के बिल पास करने के लिए छोटे-छोटे फीडर बनाए गए, लेकिन फिर लाइन लास कम नहीं हुआ। फाल्ट हर फीडर में है।

- शहर में ओवर बिलिंग भी की गई। ओवर बिलिंग करके लाइन लास नीचे दिखाया गया। बिल पास किए गए।

- आइपीडीएस योजना में भी यही स्थिति रही।नई लाइनों का निर्माण किया गया, जो फाल्ट के लिए हाट स्पाट हैं। इंसुलेटर कभी बर्स्ट हो जाते हैं।

- वितरण ट्रांसफार्मर लगाने में अनियमितता बरती गई। ग्रुप मीटर लगाए गए। इन मीटरों का ठेकेदार को मेंटेनेंस करना था, लेकिन ठेकेदार भाग गया।

फाल्ट

फाल्ट-1 शनिवार को दोपहर में एसएएफ सब स्टेशन को सप्लाइ करने वाली लाइन में फाल्ट आ गया। इससे डेढ़ घंटे से ज्यादा बिजली आपूर्ति बंद रही। जबिक इस फीडर का हाल ही में मेंटेनेंस किया गया है। मंत्री ने इस फीडर की सप्लाई को लेकर फटकार लगाई थी।

फाल्ट-2: 11 केवी पार्क फीडर का तार टूट गया। इससे तीन घंटे तक आपूर्ति बंद रही।दोपहर में लोग उमस भरी गर्मी से बेहाल हो गए।

-औसतन बड़े फाल्ट 20 आ रहे है।शिकायतों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

किस जिले में कितना खर्च

-ग्वालियर सिटी में 204 करोड़ रुपए खर्च

- ग्वालियर ओएंडएम में 140 करोड़

- दतिया जिले में 111 करोड़।

- मुरैना में 370 करोड़

-भिंड में 222 करोड़

-शिवपुरी में 280 करोड़

- श्योपुर में 107 करोड़ -

गुना में 156 करोड़ -

अशोकनगर में 102 करोड।

(यह पैसा आरएपीडीआरपी, राजीव गांधी विद्युतीकरण एवं एडीबी योजना के तहत खर्च हुआ है।)

सीधी बात

प्रदुम्न सिंह तोमर

प्रश्न:250 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद फाल्ट क्यों आ रहे हैं।

मंत्री- यह सच्चाई है कि फाल्ट बढ़े है। इस वजह से अधिकारियों की बैठक ली है। इसमें सुधार के निर्देश दिए हैं। गर्मी से लाइनों पर लोड आने से अचानक परेशानी बढ़ी है।

प्रश्न: आपने आरएपीडीआरपी योजना को लेकर अांदोलन किए हैं। अब आप ऊर्जा मंत्री है, क्या इसकी जांच कराएंगे।

मंत्री: इस योजना को समय हो चुका है।इस पर बात करना ठीक नहीं है।

प्रश्न: मोनो पोल में दावा किया कि फाल्ट नहीं आएंगे।गारंटी पीरिएड में ठेकेदार ने भी मेंटेनेंस नहीं किया।

उत्तर: इस संबंध में अधिकारियों से बात करूंगा।प्राकृतिक आपदा में समस्या बढ़ती है।

Posted By: anil.tomar
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