Gwalior Electricity News: मीटर पर चिपके क्यूआर कोड, गलत बिल से मिलेगा छुटकारा

Updated: | Tue, 28 Sep 2021 11:07 AM (IST)

- कंपनी ने सिटी सर्कल में शुरू किया काम, कर्मचारी रीडिंग लेने के साथ क्यूआर स्टीकर चिपका रहे

Gwalior Electricity News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सिटी सर्कल में मीटर पर क्यूआर कोड लगाने का शुरू कर दिया है। यह कार्य अगले माह तक पूरा हो जाएगा। फोन-पे या भीम एप की तर्ज पर मीटर रीडर हैंडहेल्ड डिवाइस से क्यूआर कोड स्कैन करेगा। स्कैन होते ही बिजली उपभोक्ता का पूरा डेटा रीडर के सामने होगा। इससे रीडर को उपभोक्ता का मीटर पहचानने में भी आसानी होगी। मल्टियों में कई मीटर एक जागह पर लगे होते है, जिस कारण रीडर उपभोक्ता को गलत बिल दे देते थे। इसे सुधरवाने उपभोक्ता को कंपनी के कार्यालय में जाना पड़ता है। क्यूआर स्कैन से अब यह परेशानी नहीं रहेगी।़शिहर में घरेलू व गैर घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या करीब दो लाख 72 हजार है। इनकी रीडिंग स्पाट बिलिंग के माध्यम से मीटर रीडर करते हैं। रीडर बदलने पर नए कर्मचारी को मीटर पहचाने में दिक्कत होती है। साथ ही कई उपभोक्ताओं को दूसरे उपभोक्ता का बिल मिलता है तो कहीं गलत रीडिंग भी दर्ज होने की दिक्कतें सामने आती हैं। करीब 20 फीसद उपभोक्ताओं को अपने बिल से शिकायत रहती है। बिजली कंपनी को मिलने वाली शिकायतें से देखने में आया कि रीडर को स्पाट बिलिंग के लिए उपभोक्ता को बुलाना होता है। कनेक्शन की पहचान के लिए पुराना बिल मांगना पड़ता है। इससे उपभोक्ताओं को भी परेशानी होती है। इस कारण रीडरों को कई बार उपभोक्ताओं की नाराजगी भी झेलना पड़ती है। इस समस्या को समाप्त करने कंपनी ने क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की है। मीटर रीडिर, रीडिंग लेने के साथ क्यूआर कोड भी चस्पा कर रहे हैं।

क्यूआर कोड की इसलिए पड़ी जरूरत

1. मल्टियों में मीटर इकट्ठे लगे रहते हैं। यहां मीटर को पहचानने में दिक्कत आती है। समूह में मीटर होने से एक दूसरे की रीडिंग दर्ज हो जाती है, जिससे लोगों को भारी भरकम बिल मिल जाता है।

2. कंपनी मीटर रीडर को बदलती रहती है। हर तीन महीने में रीडर बदल देती है। नए रीडर को मीटर की पहचान करने में दिक्कत रहती है। उपभोक्ता से पुराना बिजली बिल मांगना पड़ता है।

3. लोगों को बिल में अपना कनेक्शन नंबर देखने में दिक्कत आती है। मीटर की पर्ची में कनेक्शन नंबर भी आसानी से देख सकते हैं। आइवीआरएस नंबर दर्ज है।

4. रीडिंग ले जाने के बाद रीडर जोन सर्वर में खपत फीड करता था, जिसमें समय लगता था। लेकिन क्यूआर कोड से स्वत: ही रीडिंग फीड हो जाएगी और एक्युरेसी भी अधिक रहेगी।

रीडर मीटरों पर क्यूआर कोड चस्पा कर रहे हैं। इसे स्कैन करने पर उपभोक्ता का डेटा मीटर रीडर के सामने होगा। इस व्यवस्था से बिल में गलती की आशंका कम होगी।

विनोद कटारे, महाप्रबंधक सिटी सर्कल

Posted By: anil.tomar