Gwalior Footpath News: गुमठी-ठेले और अघोषित सब्जी मंडी से पटा फुटपाथ, सड़क पर चलना है जोखिम से भरा

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 05:19 PM (IST)

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक थाटीपुर के तमाम फुटपाथ अवैध अतिक्रमण से पट चुके हैं। थाटीपुर स्थित मयूर मार्केट के हालात सबसे अधिक खराब हैं। यहां स्थित मकान, दुकानों के सामने बने फुटपाथ पर गुमठी, ठेलों का स्थायित्व सा हो गया है। मुख्य मार्ग के किनारे बने डिवायडर नुमा फुटपाथ पर अघोषित सब्जी मंडी लगती है। इस कारण एक ओर जहां फुटपाथ खत्म हो गया है, वहीं आसपास की सड़कों पर भी वाहन पार्क होने के कारण मार्ग सकरा हो गया है। खास बात यह है कि थाटीपुर पर तमाम कोचिंग इंस्टीट्यूट हैं। यहां हजारों विद्यार्थी स्कूल-कालेज की पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं।़ िजिनमें से ज्यादातर का आना पैदल ही होता है। इन सभी विद्यार्थियों को फुटपाथ के न होने के कारण सड़क पर जोखिम लेकर पैदल चलना होता है। अत्याधिक ट्रैफिक के बीच कम उम्र के विद्यार्थियों को चलना होता है, ऐसे में कई बार वे हादसों की भी शिकार हो जाते हैं।

फुटपाथ पर गुमठियों व ठेलों ने अतिक्रमण कर रखा है। कोचिंग आने वालों के वाहन यहां-वहां खड़े रहते हैं। पैदल आने वाले ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शाम 6 बजे के बाद परेशानी बढ़ जाती है।

इशांत शर्मा, कास्मेटिक व्यापारी, मयूर मार्केट थाटीपुर

फुटपाथ पर पूरी तरह से अतिक्रमण हो गया है। वाहन चालक पार्किंग में न लगाते हुए गाड़ियों को बाजार में अंदर लेकर आते हैं। राहगीरों को काफी परेशानी होती है। हमारा व्यापार भी इस कारण से प्रभावित होता है।

आशुतोष मुथरैया, साड़ी व्यापारी, मयूर मार्केट थाटीपुर

मैं मप्र पुलिस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं। थाटीपुर स्थित कोचिंग सेंटर पर शाम को पैदल ही आना होता है, मगर सड़क पर चलते हुए ही आना पड़ता है। फुटपाथ तो हैं ही नहीं।

दिनेश माथुर, विद्यार्थी

मैं 9वीं कक्षा में पढ़ रहा हूं और मुरार से थाटीपुर तक कोचिंग के लिए पैदल ही आता हूं। फुटपाथ न होने के कारण सड़क से ही आना होता है, अत्याधिक ट्रैफिक के कारण काफी परेशानी होती है।

कृष्णा शर्मा, विद्यार्थी

मैं बीएससी व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने चौहान प्याऊ से पैदल आता हूं। फुटपाथ नहीं है तो सड़क पर ही पैदल चलना पड़ता है। थाटीपुर रोजाना हजारों विद्यार्थी आते हैं। उन्हें मेरी ही तरह परेशान होना पड़ता है, जोखिम उठाना पड़ता है।

योगेश पाराशर, विद्यार्थी

Posted By: anil.tomar