शनिदेव काे छू नहीं सके भक्त, दूर से चढ़ाया तिल और तेल, रात तक लगी रही भीड़

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 09:55 AM (IST)

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। काेराेना की तीसरी लहर के खतरे काे देखते हुए शनिचरी अमावस्या पर शनिदेव के मंदिराें में भी पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम रखे गए। बहाेड़ापुर स्थित शनि मंदिर पर परिसर तक ही भक्ताें काे प्रवेश दिया गया। शनिदेव की प्रतिमा ताले में बंद थी। भक्ताें ने बाहर लटकी बाल्टी में तेल चढ़ाया, इसके बाद देहरी पर ही तिल और प्रसाद चढ़ाया। सुबह से देर रात तक शनि मंदिराें में भक्ताें की भीड़ लगी रही।

शहर के सभी प्रमुख नवग्रह मंदिरों में सुबह से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। मंदिर के पट सुबह चार से रात्रि 12 बजे तक खुले रहे। बहोड़ापुर स्थित नवग्रह मंदिर के पट सुबह चार बजे खोले गए। इस दौरान शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक कर श्रृंगार किया गया। साथ ही इमरती का भोग लगाया गया। इसके बाद आरती हुई, जिसमें मास्क लगाकार सैकड़ों भक्तों ने उपस्थिति दर्ज कराई। मंदिर प्रबंधन ने भक्तों को दर्शनों के लिए अंदर प्रवेश नहीं दिया। भक्तों को प्रतिमा छूने और सीधे तेल चढ़ाने की अनुमति नहीं दी। इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समिति सदस्यों की पैनी नजर रही। वहीं कटी घाटी स्थित शनिदेव मंदिर में पहंुचे भक्तों के लिए अलग से तेल व प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था की गई। भक्तों को मंदिर के अंदर शारीरिक दूरी के साथ प्रवेश्ा दिया गया। अमरा पहाड़ स्थित नवग्रह मंदिर में भी भक्तों को एक-एक कर प्रवेश दिया गया। श्ानिदेव को तेल व प्रसाद चढ़ाने के लिए अलग से पात्र रखे गए। यहां के अलावा दाल बाजार, गश्त का ताजिया, थाटीपुर, तारागंज स्थित शनि मंदिर सहित अन्य शनि मंदिरों और नवग्रह मंदिरों पर भी शनिश्चरी अमावस्या विधि-विधानपूर्वक मनाई गई।

गलत कार्य करने वाले को करते हैं दंडित

ज्योतिषाचार्य डा. सतीश सोनी ने बताया कि शनि जिन राशियों में कारक होते हैं उन राशि के लोगों को साढ़े-साती बड़े स्तर पर लाभ प्रदान करती है। वृष, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए साढ़े-साती फलदायक होती है। व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर ही शुभ-अशुभ या कम ज्यादा फल प्राप्त होता है। शनि अच्छे कार्य करने वालों को पुरस्कृत करते हैं, वहीं गलत कार्य करने वालों को दंडित करते हैं।

Posted By: anil.tomar