HamburgerMenuButton

Gwalior injection ka dose Column News: फर्जी सैंपलिंग का जिन्न

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 09:41 AM (IST)

Gwalior injection ka dose Column News: अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। कोरोना की रफ्तार को कंट्रोल करने का फार्मूला हाथ लगा तो साहब की खुशी का ठिकाना न रहा। आवाज भी में दबंगाई आ गई थी। अफसर भी उनके हुनर के कायल हो गए थे। लगने लगा था अब जब चाहेंगे कोरोना को कंट्रोल कर लेंगे, क्योंकि सैंपलिंग का बाजीगर जो उनके साथ है। कहावत सही है कि अति हर चीज की बुरी होती है। एक दिन थकान मिटाने कूल पार्टी ने बाजीगरी बेकार कर दी। हुआ यूं कि साहब को लगा कि वह जो कर रहे हैं, उस पर किसी की नजर नहीं है। सो उन्होंने अपने ही सहयोगियों की मेहनत को खुद का हुनर बताना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब कूल पार्टी में मामला हॉट हो गया। मामला बिगड़ा तो सैंपलिंग का फर्जीवाड़ा जिन्न की तरह बाहर निकला। अब साहब असमंजस में हैं आखिर जिन्न को जगाने वाला है कौन।

चिड़िया बैठाई, मिल गई खुशियांः जेएएच में जनरेटर ने दो साहबों को खुशी दी है। बड़े दिनों बाद मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। साहब की नजरों को अब यही तलाश है कि कहां पर अपनी चिड़िया बिठा दूं और खुशी उठा लूं। यह भी सच है कि इस खुशी को हर कोई नहीं महसूस कर सकता। इन दिनों शासन से नियुक्त दो नुमाइंदों का खुशी का ठिकाना नहीं है, क्योंकि उन्हें समझ आ गया कि अस्पताल में चिड़िया बिठाने पर कई तरह की खुशी मिलती है। अभी तक बड़े साहब के नुमाइंदे चिड़िया बिठाकर खुशी बटोर रहे थे। उनसे खुशी छिन गई तो दो साहबों के पास चली गई। छोटे साहब ने दलगत राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तो पहले ही लाभ ले लिया। बड़े साहब को समझ आया तो वह भी इस डगर पर बढ़ गए। अब शासन ने काम गिना दिए तो टेंशन में हैं।

ताल से ताल मिलेे ताे प्रभार भी बढ़ेः ताल से ताल मिला... ताल फिल्म के इस गाने के चंद शब्दों के भाव शायद यही है कि जब दो लोगों के आचार और विचार मिल जाते हैं तो दोनों की गाड़ी विकास के पथ पर दौड़ जाती है। अरे भाई ऐसा मत समझो कि योजनाओं से विकास नहीं होगा। जब योजना विकास का प्रभार मिला है तो विकास होना तो लाजमी है। बात एक हजार बिस्तर के अस्पताल की हो या फिर हाइट्स समिति या फिर किसी भी स्टोर की, हर जगह विकास फूट रहा है। चर्चा तो यह भी है कि साहब इन दिनों अवकाश पर भी विकास करने से नहीं चूक रहे। यही कारण है जेएएच में विकास का पहिया तेज घूम रहा है और ठाकुर पर जिम्मेदारी का भार बढ़ रहा है। साहब पर चंद लम्हे भी खुद के लिए नहीं हैं, वे तो ताल से ताल मिला रहे हैं।

आग के तापने का इंतजारः जयारोग्य अस्पताल की पत्थर वाली बिल्डिंग में लगी आग की जांच रिपोर्ट का सभी को बेसब्री से इंतजार है। हर कोई यही जानने के लिए बेकरार है कि आग में कौन-कौन सी कीमती दवाएं जलकर खाक हाे गईं। लोग जानना चाहते हैं कि कोरोना का रेमडेसिविर और फंगस का एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन कितने जले। इसके अलावा अन्य महंगी दवाओं में कोई जली अथवा नहीं। दूसरी बात यह है कि आखिर आग लगी कैसे? इस बारे में भी लेाग जानना चाहते हैं, क्योंकि फायर ब्रिगेड अमला कह चुका है कि आग शॉर्ट-सर्किट से नहीं बीड़ी या सिगरेट से लगी है। अब डाक्टर एक-दूसरे में बीड़ी-सिगरेट की गंध सूंघने का प्रयास कर रहे हैं। इन दिनों सभी की निगाहें छोटे ठाकुर पर टिकी हैं, क्योंकि कभी-कभी शौक भी गले की हड्डी बन जाते हैं। हालांकि वे पहले ही बोल चुके हैं न दवा जली न नुकसान हुआ।

Posted By: vikash.pandey
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.