Gwalior Jivitputrika Vrat: संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए माताएं रखेंगी जीवित्पुत्रिका व्रत

Updated: | Mon, 27 Sep 2021 09:26 AM (IST)

Gwalior Jivitputrika Vrat: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने का विधान है। जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया या जिउतिया व्रत भी कहते हैं। यह व्रत सप्तमी से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलता है। जितिया व्रत को महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं।

व्रत का महत्व

यह व्रत संतान की खुशहाली, निरोगी जीवन और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। यह व्रत नहाए खाए के साथ शुरू होता है। दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है।

व्रत का शुभ मुहूर्त

28 सितंबर की शाम 06 बजकर 16 मिनट से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू होगी। यह 29 सितंबर की रात 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। अष्टमी तिथि के साथ व्रत समाप्त नहीं होगा। व्रत का पारण 30 सितंबर को किया जाएगा।

व्रत की पूजा विधि

सुबह स्नान करने के बाद प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीपकर साफ कर वहां एक छोटा सा तालाब बना लें। तालाब के पास एक पिपरी की डाल लाकर खड़ा कर दें। अब शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुश से निर्मित मूर्ति बनाकर जल के पात्र में स्थापित कर दीप, धूप, अक्षत, रोली और लाल और पीली रूई से सजा कर भोग लगाएं। मिट्टी या गोबर से मादा चील और मादा सियार की प्रतिमा बना कर लाल सिंदूर अर्पित कर पुत्र की प्रगति और कुशलता की कामना करें। इसके बाद व्रत कथा सुनें।

व्रत पारण का समय

व्रत रखने वाली माताएं 30 सितंबर को सूर्योदय के बाद दोपहर 12 बजे तक पारण करें। मान्यता है कि व्रत का पारण दोपहर 12 बजे तक कर लेना चाहिए।

Posted By: anil.tomar