Gwalior lamps made of cow dung: बड़े शहरों से आई गोबर से बने दीयों की डिमांड

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 05:29 PM (IST)

- शहर के कुछ सदस्य गोबर से बना रहे दीये, दूसरों को दे रहे रोजगार

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर में बने गोबर के उत्पाद विदेशों तक पहुंच रहे हैं। फिलहाल विदेशी धरती के अलावा देश के अलग-अलग शहरों से दीपावली के लिए गोबर से बने दीयों की मांग आ रही है। खास बात यह है मांग में सिर्फ दीये ही शामिल नहीं है, बल्कि खरीदार उनके रंगों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इन्हें तैयार करने वाले सदस्यों का कहना है जिन लोगों के उन तक आर्डर आ रहे हैं, उनमें भारतीयों के साथ विदेशी परिवार भी शामिल हैं। उन्हें दीये भेजकर वे अभिभूत हैं। कहते हैं कि वे विदेशी धरती पर भारतीय संस्कृति को भेज रहे हैं।

गोबर के दीयों के साथ पूजन की अन्य सामग्री तैयार करने वालीं लेखिता सिंघल का कहना है शुरुआती चरण में उन्होंने गत वर्ष सैंपल के तौर पर कुछ दीये बनाए थे, जो पटेल नगर में रहने वाले पड़ोसियों को काफी पसंद आए। इसके बाद उन्होंने आनलाइन प्लेटफार्म पर अपने क्रिएशन को पहुंचाया। उनके प्रयासों को भारतीय ही नहीं, विदेशियों ने भी पसंद किया। जब बात आगे बढ़ी तो उन्होंने आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की 15 महिलाओं से संपर्क किया और उन्हें रोजगार दिया। गोबर एकत्रित करने की जिम्मेदारी इन्हीं महिलाओं को सौंपी गई है । उन्हें प्रति नग के हिसाब से भुगतान किया जाता है। लेखिता ने बताया दीपावली के लिए उनके पास दिल्ली, नोयडा, आगरा, पुणे, कोलकाता, मुंबई, जयपुर, दुबई और रायपुर से आर्डर आए हैं।

घर में ही पाल लीं हैं गाय, कर रहे गोबर एकत्रित

गोबर से दीये बनाने वाले ब्रजेश नागर ने बताया कि गत वर्ष उन्होंने गोबर से दीये बनाना शुरू किया था। कोविड के कारण उनके प्रयास शहर तक ही सीमित रहे। इस साल उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी को आनलाइन किया। मांग बढ़ी तो उन्होंने और भी लोगों को अपने साथ जोड़कर रोजगार दिया। सराफा बाजार में रहने वाले ब्रजेश के पास तीन गाय हैं। इनके गोबर को उन्होंने लगातार एक साल तक मैदान में एकत्रित कर सुखाया। इनके पास दीपावली के लिए देश के अलग-अलग शहरों से 25 हजार से अधिक दीयों की मांग आई है। इन दीयों को शनिवार से तय पते पर भेजना शुरू करेंगे। फिलहाल वे दीयों पर पेंट कर रहे हैं । दीयों की कीमत आकार के हिसाब से 10, 15 और 20 रुपये तय की गई है।

40 मिनट में तैयार होते हैं दीये

- सबसे पहले गाय के गोबर को इकठ्ठा कर सुखाया जाता है।

- इसके बाद गोबर का बारीक चूरा बनाकर उसमें मुल्तानी मिट्टी, ग्वार, गम और कपूर मिलाया जाता है।

- छानने के बाद उसे फिर पानी डालकर गूथा जाता है।

- इसके बाद सांचे में रखकर मनचाहा रूप सिर्फ 40 मिनट में पाया जाता है।

Posted By: anil.tomar