Gwalior Municipal Corporation News: निगम के अपर आयुक्त गुप्ता की सीएम पीएस व ईओडब्ल्यू में की शिकायत

Updated: | Mon, 20 Sep 2021 02:30 PM (IST)

Gwalior Municipal Corporation News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर की स्मार्ट पार्किंग को संचालित करने वाली डेफोडिल कंपनी द्वारा करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की गई है। इसके कारण स्मार्ट सिटी सीईओ जयति सिंह ने टेंडर को निरस्त करते हुए कंपनी पर रिकवरी निकाल दी है। साथ ही पार्किंग भी नगर निगम को हैंडओवर कर दी है। इसके बाद प्रभारी निगमायुक्त आशीष तिवारी के कार्यकाल में अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता ने नोटशीट में कंपनी से दो करोड़ 22 लाख रुपये की रिकवरी निकाली, लेकिन इसके बाद भी शहर में डेफोडिल कंपनी अवैध रूप से पार्किंग संचालित कर रही है। साथ ही अब अपर आयुक्त भी नोटशीट को बदलने की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले में आरटीआइ कार्यकर्ता विनोद कुमार ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव, ईओडब्ल्यू एसपी, ईओडब्ल्यू भोपाल आदि में अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता की शिकायत की है।

शिकायत में बताया गया है कि नगर निगम के अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता डेफोडिल कंपनी को लाभ देने के लिए नोटशीट में बदलाव करने की तैयारी में हैं, जबकि इसी फर्म का टेंडर स्मार्ट सिटी सीईओ जयति सिंह ने निरस्त कर इसका पत्राचार प्रभारी निगमायुक्त आशीष तिवारी से किया था। इसके साथ ही कंपनी पर दो करोड़ 22 लाख की रिकवरी भी निकाली गई थी, लेकिन अब सेटिंग हो जाने के बाद ठेकेदार की इच्छा के अनुरूप नोटशीट में परिवर्तन किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता की विगत तीन दिन की मोबाइल कॉल डिटेल एवं उनके घर के सीसीटीवी फुटेज लिए जाएं तो पूरा मामला साफ हो जाएगा कि ठेकेदार से कितनी बार अपर आयुक्त की बात हुई है। शिकायत में लिखा गया है कि अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता ने प्रभारी निगमायुक्त आशीष तिवारी के आदेश को भी मूल फाइल से हटा दिया है।

होर्डिंग के टेंडर में भी गड़बडी

होर्डिंग शाखा के अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता हैं। अपर आयुक्त ने अभी खंबों पर बैनर लगाने के टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसमें एक व्यक्ति विशेष ठेकेदार को लाभ देने के लिए निर्धारित की गई दरों को छुपा दिया गया है। जबकि लम-सम के टेंडर में कभी भी दरों को नहीं छुपाया जाता है। इसी प्रकार क्योस्क के टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इसमें खंबों की संख्या को कम कर दिया गया, जबकि बाद में यह मामला सुर्खियों में आया तो टेंडर को वापस बुला लिया गया। इससे प्रमाणित होता है कि अपर आयुक्त केवल व्यक्ति विशेष को लाभ देने का कार्य कर रहे हैं ना कि निगम हित में। अपर आयुक्त ने तीन कर्मचारियों को अपने बंगले में लगाया है, जबकि अपर आयुक्त को इन कार्यों की पात्रता नहीं है।

मेरे खिलाफ जो शिकायत की गई है वह निराधार है़मिेरे पास जैसे ही फाइल आई थी मैंने नोटशीट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज दी थी। वहां से अनुमोदन आते ही उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही टेंडर वाले मामले में मेरे स्टाफ ने बताया था कि इसमें दरों को शो नहीं किया जाता है, इसलिए दरें शो नहीं की गईं। वरिष्ठ अधिकारी निर्देश देंगे तो दरों को भी शो कर दिया जाएगा। जो शिकायत की गई है वह निराधार है।

मुकुल गुप्ता, अपर आयुक्त नगर निगम

Posted By: anil.tomar