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Gwalior News: बच्चों ने किताबों से मुंह फेरा, गैजेट्स से जोड़ा नाता

Updated: | Wed, 14 Apr 2021 02:55 PM (IST)

Gwalior News: आनंद धाकड़, ग्वालियर नईदुनिया। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से बच्चे प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और हाईस्कूल के बच्चे अपने स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमण के कारण उनके घूमने और दोस्तों से मिलने पर भी पाबंदियां लग चुकी हैं। उनका पूरा वक्त घर में ही बीत रहा है। उनकी कक्षाएं भी पूरी तरह से आनलाइन ही संचालित हो रही हैं। इससे वे चिड़चिड़ हो रहे हैं। इस बात को स्वीकारते हुए सहोदय अध्यक्ष डा. राजेश्वरी सावंत ने बताया कि बच्चों के व्यवहार बदलने से अभिभावक काफी परेशान हैं। वे पैरेंट्स मीटिंग के दौरान बच्चों के बदलते व्यवहार के कारण परेशानी में आने की बात करते हैं। आनलाइन क्लास की वजह से बच्चों को मोबाइल देना उनकी मजबूरी बन गई है, लेकिन वे इस मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। उस पर गेमिंग के साथ-साथ दोस्तों के साथ चैटिंग करते रहते हैं। कई बार शिक्षक आनलाइन क्लास में बच्चे को आवाज देती है, मगर उसका जवाब न मिलने से स्पष्ट हो जाता है वह वीडियो आफ कर किसी और दूसरे काम में व्यस्त है। अधिक आवाज में गाने सुनना और हिंसक प्रवृति के प्रैंक वीडियो देखना उनकी आदत में शुमार हो चुका है। चौकाने वाली बात तो यह है बच्चों के मन में स्कूल न खुलने की बात पूरी तरह से बैठ गई है। उनका मन इनडोर एक्टिविटी की तरफ से हट गया है। ऐसा लग रहा है मानो किताबें उनके जीवन का हिस्सा ही नहीं हैं। मनोवैज्ञानिक इस स्थिति को काफी चिंताजनक मानते हैं। वे कहते हैं बच्चे मिट्टी के घड़े होते हैं, उन्हें जैसा माहौल मिलता है वे उसी जैसे हो जाते हैं। इस दिशा में अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों को ठोस कदम उठाने होंगे, जिससे वे ट्रैक पर आ सकें।

30 प्रतिशत अनुशासनहीनता की शिकायत आ रही सामनेः पैरेंट्स में तीस प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों के अनुशासन से दूर होने की बात स्वीकारी है। ऐसे बच्चे मिडिल और हाईस्कूल के हैं। अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे अनुशासन भूल चुके हैं। अगर उनसे बात करो तो झल्लाकर बात करते हैं। ज्यादा गुस्सा होने पर सामान की तोड़फोड़ शुरू कर देते हैं। वह सुकून में तभी नजर आता है जब उसके हाथ में मोबाइल हो। आनलाइन कक्षाओं की वजह से बच्चों की जिंदगी घर और फोन तक ही सीमित रहे गई है।

दादा-दादी का संग भा रहा बच्चों कोः इन दिनों बच्चों का समय घर ज्यादा बीत रहा है। परिवार के साथ खाना खाना उन्हें काफी पसंद आ रहा है, जो कि अपने परिवार के और भी करीब ला रहा है। दादा-दादी के साथ बैठकर उनकी कहानियां सुनना साथ खाना बच्चों को खूब पसंद आ रहा है। जब वह विद्यालय जाते थे तब वह परिवार लोगों से मिलना कम हो पाता था।

ओपन बुक प्रणाली से लिखने की क्षमता कर रहे डवलपः चौथी से आठवी तक आनलाइन मोड पर कक्षाएं होने की वजह से बच्चों में देखा जा रहा था। बच्चों को लिखने की क्षमता कम होती जा रही थी। इसलिए उन्हें लिखने का होम वर्क दिया जा रहा है। जिससे वह लिखने स्किल न भूलें। पिछले साल से अब तो चालीस प्रतिशत ऐसे बच्चे सामने आए हैं, जिनकी लिखने की क्षमता घट गई है।

गुमसुम बच्चों की 15 प्रतिशत बड़ी बोलने की क्षमताः बच्चे जब स्कूल में जाते थे तब कक्षा में अपनी टीचर से बात करने में कतराते थे, लेकिन अब ऐसे बच्चों को देखते हुए टीचर आनलाइन मोड पर चल रही कक्षाओं में भी हर एक बच्चे से बात करती है। जिससे उन बच्चों में बोलने की क्षमता 15 प्रतिशत बढ़ गई है। साथ ही उनसे सामाजिक बाते करती हैं। जिससे वह सामाज से भी जुडाव रख सकें।

Posted By: vikash.pandey
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