Gwalior News Nursing Home Act News: पंजीयन शुल्क हुई पांच गुना, एक डाक्टर एक अस्पताल में दे सकेगा सेवाएं

Updated: | Mon, 25 Oct 2021 07:15 AM (IST)

Gwalior News Nursing Home Act News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। नए नर्सिंगहोम का गजट नोटिफिकेशन हो चुका है। नए नर्सिंग होम एक्ट के अनुसार अब एक डाक्टर एक ही अस्पताल में अपनी सेवाएं दे सकेगा। यदि वह एक साथ एक से अधिक अस्पतालों में सेवाएं देता है तो उसके खिलाफ नर्सिंगहोम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह गजट नोटिफिकेशन 13 अक्टूबर को हो चुका है। जो निजी संस्थाएं पहले से काम कर रही हैं उन्हें अपनी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सीएमएचओ कार्यालय से 15 दिवस का समय दिया गया है। नर्सिंगहोम एक्ट के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं सुधार नहीं होता तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। खास बात यह है कि अब नई संस्था का पंजीयन शुल्क पांच गुना अधिक हो चुका है। 100 बेड से अधिक के अस्पताल में खुद का ऑक्सीजन प्लांट लगाना अनिवार्य किया गया है।

यह हुए मूलभूत परिवर्तन

- एक अस्पताल में ही ड्यूटी दे सकेगा डाक्टर-

- 15 बेड पर एक ड्यूटी डाक्टर की अनिवार्यता है। एक अस्पताल में ड्यूटी देने वाला डाक्टर किसी दूसरे अस्पताल में अपनी सेवाएं नहीं दे सकता। अभी तक एक डाक्टर अलग अलग निजी अस्पतालों में अपने दस्तावेज देकर उस अस्पताल में अपनी उपलब्धता बताता था। लेकिन अब ऐसा नहीं कर सकेगा।

पांच गुना हुई पंजीयन शुल्क

पंजीयन शुल्क में भी पांच गुना की बढ़ोत्तरी की गई है।

संस्थान पहले अब शुल्क

क्लीनिक 600 3000

10बेड अस्पताल 600 3000

10 से 20 बेड 1050 5250

20 से 30 बेड 1350 6750

30 से अधिक 45रुपए प्रति बेड 225 रुपए प्रति बेड

नोट: क्लीनिक से तत्यपर्य निजी कलीनिक, पैथोलॉजी, एक्सरे सेंटर आदि शामिल हैं।

100 बेड से अधिक के अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट अनिवार्य

अब 100 बेड के अस्पताल में 25 फीसद बेड पर ऑक्सीजन की उपलब्धता अनिवार्य होगी। 100 बेड से अधिक के अस्पताल में अस्पताल को स्वयं का ऑक्सीजन प्लांट या फिर लिक्युड ऑक्सीजन टेंक लगाना अनिवार्य होगा।

जिस विधा का डाक्टर उसी विधा का खोल सकेगा अस्पताल

नर्सिंगहोम एक्ट में बताया गया कि जिस विधा का डाक्टर उसी विधा में अस्पताल खोल सकेगा। जिस तरह से आयुर्वेद डाक्टर यदि परमिशन मांगता है तो उसे आयुर्वेद अस्पताल खोलने की इजाजत दी जाएगी। इसी तरह से एलोपैथी के डाक्टर, एलोपैथी पद्दति से अस्पताल में इलाज दे सकेगा। सीएमएचओ के अनुसार यदि कोई नोन मेडिको व्यक्ति अस्पताल की परमिशन लेता है तो उसे जिस पद्दति में खोलना है उसी पद्दति के डाक्टरों के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। अब एलोपैथी पद्दति से संचालित अस्पताल में आयुर्वेद या अन्य पद्दति का डाक्टर सेवाएं नहीं दे सकेगा।

पोल्युशन बोर्ड से अनुमिति के बाद ही संचालित होगा अस्पताल

निजी अस्पताल पंजीयन के बाद अब अस्पताल संचालित तभी कर सकेगा जब वह पोल्युशन बोर्ड से अनुमति ले लेगा। नए नर्सिंगहोम एक्ट में कहा गया कि पंजीयन के बाद संस्थान को पोल्युशन बोर्ड से एनओसी लेना होगी और मेडिकल बेस्ट के निष्पादन के लिए इंसीनेटर से रसीद कटानी होगी। तभी वह अस्पताल का संचालन शुरू कर सकेगा।

बिना अनुमति के निजी अस्पताल में परामर्श भी नहीं दे सकेगा सरकारी डाक्टर

सरकारी डाक्टर किसी निजी अस्पताल में परामर्श से लेकर ऑपरेशन बिना अनुमति के अपनी सेवाएं नहीं दे सकता। सरकारी डाक्टर किसी निजी संस्था में इमरजेंसी में ही सेवाएं देने जाएगा वह भी उसे अपने संस्था के वरिष्ठ अफसर से अनुमति लेनी होगी और कारण बताना होगा। जिस निजी संस्था में सेवा दी जा रही है उस संस्था व डाक्टर को सीएमएचओ कार्यालय को सूचना देनी होगी।

भर्ती मरीज को यह सुविधा देना अनिवार्य

भर्ती मरीज को एक पलंग, गद्दे सहित, एक तकिया, ,कुर्सी या स्टूल, कंबल, हर दिन चादर की बदली की जाए और बेड के बगल से लॉकर देना होगा।

इनका कहना है

नया नर्सिंगहोम एक्ट में मूलभूत परिवर्तन हुए हैं। एक डाक्टर एक से अधिक संस्थाओं में अपनी सेवाएं नहीं दे सकेगा। बड़े अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की अनिवार्यता रखी गई है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवक्ता में सुधार होगा। जो संस्थाएं पहले से संचालित हैं उन्हें सुधार करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

डा मनीष शर्मा, सीमएचओ

नए नर्सिंग होम एक्ट का स्वागत है। एक डाक्टर जब कहीं पर 8 घंटे ड्यूटी देगा तो वह दूसरे स्थान पर सेवाएं देने की स्थिति में नहीं होता , लेकिन विशेषज्ञ डाक्टर तो अपनी सेवाएं एक से अधिक स्थान पर सेवाएं दे सकेगा और विशेषज्ञ डाक्टर के लिए एक संस्थान का नियम एक्ट में नहीं है। पेंडेमिक में देखा कि ऑक्सीजन की किस तरह से आवश्यकता पड़ी उस हिसाब से बड़े स्थानों में ऑक्सीजन की उपलब्धता होनी ही चाहिए। छोटे अस्पतालों को इनसे अलग रखना चाहिए। यह आइएमए की तरफ से शासन से डिमांड भी रहेगी।

डा प्रियंवदा भसीन, अध्यक्ष आइएमए ग्वालियर

Posted By: anil.tomar